Municipal Corporation of Delhi (MCD) जल्द ही दिल्ली के नौ एंट्री पॉइंट्स पर मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम शुरू करने की तैयारी में है। इस प्रोजेक्ट के तहत फिजिकल बैरियर्स को हटाकर FASTag और ऑटोमैटिक कैमरा सिस्टम लगाए जाएंगे।
दिल्ली नगर निगम (MCD) का लक्ष्य अक्टूबर 2026 के अंत तक दिल्ली के नौ प्रमुख राजमार्ग एंट्री पॉइंट्स पर आधुनिक टोलिंग सिस्टम लागू करना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक जाम को कम करना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाना है। इसके लिए परंपरागत टोल नाकों को हटाकर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और FASTag टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल, MCD को इस प्रोजेक्ट के लिए National Highways Authority of India (NHAI) से अनिवार्य 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' मिलने का इंतजार है।
इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट और कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका
इस प्रोजेक्ट के तहत सड़कों पर ऊंचे गैन्ट्री और कैमरा सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Sahakar Global, जो MCD के 154 टोल प्लाजा के कलेक्शन का काम देख रही है, इस पूरी टेक्नोलॉजी को लागू करने के लिए जिम्मेदार है। कंपनी इस प्रोजेक्ट में करीब ₹200 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश करेगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि Sahakar Global एक अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए यह शेयर बाजार में उपलब्ध नहीं है, हालांकि यह इंडस्ट्री क्रेडिट रेटिंग्स के दायरे में आती है।
क्या हैं चुनौतियां और रिस्क?
प्रोजेक्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या गाजीपुर जैसे व्यस्त रास्तों पर निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को सुचारू रखना है। इसके अलावा, टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में मुनाफा मार्जिन काफी कम होता है, जिससे ₹200 करोड़ का बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर ठेकेदार के लिए वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है। अतीत में भी इस तरह के टेंडर प्रक्रिया पर राजनीतिक विवाद और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, जिस पर निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को कड़ी नजर रखनी होगी।
सेक्टर का नजरिया और आगे क्या?
यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की 'बैरियर-फ्री' हाईवे यात्रा के विजन का हिस्सा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय 2027 तक अधिकांश नेशनल हाईवे टोल प्लाजा को इस सिस्टम में बदलने की योजना बना रहा है। FASTag की सफलता ने देश के टोल रेवेन्यू में भारी इजाफा किया है। हालांकि, इस ऑटोमेशन की सफलता तकनीकी विश्वसनीयता पर टिकी है। फिलहाल निवेशकों को NHAI से मिलने वाली मंजूरी पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि उसके बिना यह काम शुरू नहीं हो पाएगा।
