जर्मन एयरलाइन Lufthansa भारत में अपनी सेवाएं बढ़ाने जा रही है। कंपनी अपने ₹3 अरब (करीब ₹25,000 करोड़) के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के तहत भारत में बड़े एयरक्राफ्ट तैनात करेगी और नई केबिन सुविधाएं भी शुरू करेगी। Lufthansa के लिए भारत दूसरा सबसे बड़ा इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट बन गया है, इसलिए कंपनी मौजूदा रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
Detailed Coverage
भारत में Lufthansa की दमदार वापसी!
Lufthansa ग्रुप भारत में अपनी मौजूदगी को और मजबूत कर रहा है। एयरलाइन ने पुष्टि की है कि फ्लाइट फ्रीक्वेंसी के हिसाब से भारत अब उसका दूसरा सबसे बड़ा इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट है। इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, कंपनी अपने ₹3 अरब (लगभग ₹25,000 करोड़) के ग्लोबल प्रोडक्ट अपग्रेड का एक हिस्सा भारतीय रूट्स पर लागू कर रही है। इस बड़े निवेश का फोकस पैसेंजर्स के अनुभव को बेहतर बनाना है, जिसमें नई लॉन्ग-हॉल केबिन डिजाइन, डिजिटल सर्विस और बेहतर एयरपोर्ट लाउंज शामिल हैं।
बड़े प्लेन, नई उड़ानें
Lufthansa नए डेस्टिनेशन लॉन्च करने के बजाय, मौजूदा हाई-डिमांड रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ा रही है। कंपनी प्रमुख भारतीय शहरों के लिए अपनी फ्लीट को अपग्रेड कर रही है। दिल्ली और हैदराबाद में पहले से ही नए 'Allegris' केबिन वाली Boeing 787-9 एयरक्राफ्ट सेवा दे रहे हैं। मुंबई को 8 अगस्त से ये अपग्रेडेड प्लेन मिलने लगेंगे। इसके अलावा, Mumbai-Munich रूट पर Airbus A380 तैनात करने की योजना है, जिससे इस रूट पर सीटिंग कैपेसिटी दोगुनी हो जाएगी। अक्टूबर से Zurich और Bengaluru के बीच एक नया रूट भी शुरू होने वाला है।
ऑपरेशनल चुनौतियां और नियम
यात्री मांग बढ़ने के बावजूद, Lufthansa का विस्तार भारत और अन्य देशों के बीच द्विपक्षीय एयर सर्विस एग्रीमेंट (ASA) पर निर्भर करता है। ये समझौते तय करते हैं कि एयरलाइन कितनी फ्रीक्वेंसी पर उड़ान भर सकती है। पश्चिम एशिया में मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण फ्लाइट पाथ बदलने और फ्यूल की खपत बढ़ने जैसी चुनौतियों के बावजूद, Lufthansa का कहना है कि भारत-विशिष्ट ऑपरेशंस पर इसका असर मैनेज करने लायक है।
पैसेंजर एयरलाइन के अलावा, Lufthansa ग्रुप की भारत में टेक्निकल और सिस्टम्स डिवीजन्स में भी मजबूत उपस्थिति है। Lufthansa Technik Services India बेंगलुरु में 500 से अधिक कर्मचारियों के साथ काम करती है, और Infosys के साथ इसका ज्वॉइंट वेंचर 200 से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। ग्रुप का भारत में एक डेडिकेटेड कार्गो डिवीजन भी है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए, इस विस्तार की सफलता कुछ फैक्टर्स पर निर्भर करेगी: बढ़ती क्षमता के साथ हाई सीट यूटिलाइजेशन रेट बनाए रखना, भू-राजनीतिक कारणों से बढ़े हुए रूट कॉस्ट का प्रॉफिट मार्जिन पर असर, और द्विपक्षीय एग्रीमेंट के तहत मिलने वाली क्षमता की सीमाएं। बाजार के लिए अगली बड़ी खबर Zurich-Bengaluru रूट का परफॉर्मेंस और फ्लीट अपग्रेड का प्रति पैसेंजर यील्ड पर प्रभाव हो सकता है।
