Lakshadweep प्रशासन ने Skyhop के सीप्लेन परमिट को रद्द कर दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिससे सरकारी UDAN स्कीम के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
Lakshadweep प्रशासन ने Skyhop को सीप्लेन कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए दिए गए ऑपरेटिंग परमिट को अचानक रद्द कर दिया है। इस फैसले से कंपनी की सभी कमर्शियल योजनाएं रुक गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने इस प्रोजेक्ट की तैयारी में पहले ही भारी पूंजी निवेश कर दी थी, जिसमें एयरक्राफ्ट लीजिंग और क्रू की ट्रेनिंग शामिल थी।
कंपनियों के सामने खड़ी चुनौती
उड्डयन क्षेत्र में किसी भी कमर्शियल ऑपरेशन की शुरुआत से पहले भारी भरकम खर्च होता है। अब Skyhop के सामने बड़ी चुनौती अपने 'आइडल एसेट्स' को मैनेज करने की है। कंपनी को बिना किसी रेवेन्यू के एयरक्राफ्ट लीज और स्टाफ की सैलरी जैसे खर्च उठाने पड़ रहे हैं। प्रशासन ने इसके पीछे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी का तर्क दिया है, लेकिन किन सुरक्षा मानकों या सुविधाओं की कमी है, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।
UDAN स्कीम और जमीनी हकीकत
यह मामला केंद्र सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम यानी UDAN की चुनौतियों को उजागर करता है। भले ही यह पॉलिसी रिमोट इलाकों में एयर ट्रैवल को सब्सिडी के जरिए बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन इसकी सफलता जमीन पर मौजूद इकोसिस्टम पर टिकी है। सीप्लेन के संचालन के लिए वाटर एयरोड्रोम, फ्यूल लॉजिस्टिक्स और DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
क्या है पिछला अनुभव?
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले SpiceJet ने भी गुजरात में Trans Maldivian Airways के साथ मिलकर सीप्लेन सर्विस शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन लॉजिस्टिक जटिलताओं और ऑपरेशनल लागत के कारण वह वेंचर भी बंद हो गया। इन उदाहरणों से साफ है कि रिमोट एयर ट्रैवल की सफलता पूरी तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और लगातार मिलने वाले रेगुलेटरी सपोर्ट पर निर्भर करती है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन भविष्य में इसे लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप तैयार करता है या नहीं।
