BlaBlaCar का जलवा! केरल में 50% बढ़ी कारपूलिंग, भारत बना सबसे बड़ा मार्केट

TRANSPORTATION
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BlaBlaCar का जलवा! केरल में 50% बढ़ी कारपूलिंग, भारत बना सबसे बड़ा मार्केट

केरल में BlaBlaCar के ज़रिए कारपूलिंग में पिछले साल के मुकाबले 50% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो कि देश के औसत से काफी ज़्यादा है। जहां कंपनी ने लाखों यात्रियों की यात्राओं और यात्रियों के पैसों की बचत की बात कही है, वहीं यह एक प्राइवेट कंपनी है और स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है। यह ग्रोथ लोगों के यात्रा करने के तरीके में बदलाव दिखाती है, लेकिन इसके बिजनेस मॉडल को प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर अभी भी रेगुलेटरी अस्पष्टता का सामना करना पड़ रहा है।

केरल बना कारपूलिंग का नया हब

BlaBlaCar प्लेटफॉर्म के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में शहरों के बीच कारपूलिंग में साल-दर-साल 50% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। यह ग्रोथ 35-40% के राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के अच्छे हाईवे, पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतें और लोगों की साझा यात्रा को तरजीह देना इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं।

भारत BlaBlaCar का सबसे बड़ा मार्केट

भारत अब BlaBlaCar के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है, जिसने फ्रांस और ब्राज़ील जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। 2026 के पहले हाफ में, इस प्लेटफॉर्म ने पूरे भारत में 1.2 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को मंज़िल तक पहुँचाया, जिससे यात्रियों के करीब ₹492.7 करोड़ बच गए। कारपूलिंग से यात्रा का खर्च बांटने पर गाड़ी का बेहतर इस्तेमाल होता है और सड़कों पर अकेले चलने वाली गाड़ियों की संख्या कम होती है।

पब्लिक के लिए कोई शेयर नहीं

यह जानना ज़रूरी है कि BlaBlaCar एक प्राइवेट कंपनी है। यह किसी भी पब्लिक स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। ऐसे में, इसके शेयर की कीमत, पब्लिक फाइनेंशियल रिजल्ट या रिटेल इनवेस्टर्स के लिए कोई ट्रेडिंग का मौका नहीं है। कंपनी की वैल्यू और फाइनेंसियल हेल्थ प्राइवेट फंडिंग से तय होती है।

रेगुलेटरी चुनौतियां बरकरार

ऑपरेशनल ग्रोथ के बावजूद, भारत में कारपूलिंग सेक्टर अभी भी एक 'ग्रे एरिया' में है। असली खतरा इस बात में है कि क्या यह सिर्फ खर्च बांटने का मामला है, या फिर यह कमर्शियल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के दायरे में आता है, जिसके लिए खास लाइसेंस की ज़रूरत होती है। पहले भी देश के कई हिस्सों में ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने ऐप-आधारित कारपूलिंग सेवाओं पर सवाल उठाए हैं।

आगे की राह

कंपनी और कारपूलिंग सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का बनना है। कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि ऐसी पॉलिसी गाइडलाइन्स ज़रूरी हैं जो लोगों के बीच सिर्फ खर्च बांटने और कमर्शियल टैक्सी सर्विस के बीच फर्क बता सकें। जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता, कंपनी को ऑपरेशनल मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.