Kerala Solar Ferry: सोलर फेरी बेड़े का विस्तार, अब पानी के रास्ते होगा भारी माल का ट्रांसपोर्ट

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AuthorMehul Desai|Published at:
Kerala Solar Ferry: सोलर फेरी बेड़े का विस्तार, अब पानी के रास्ते होगा भारी माल का ट्रांसपोर्ट

केरल अपने सोलर-इलेक्ट्रिक फेरी बेड़े को बड़े पैमाने पर बढ़ा रहा है। जुलाई **2026** तक **6** नई यात्री नौकाएं शामिल होंगी, जबकि कोच्चि स्थित Navalt अब **100 टन** की मालवाहक नौकाएं भी बना रही है, ताकि हाईवे पर ट्रैफिक का बोझ कम किया जा सके।

कमर्शियल स्केल पर वॉटर ट्रांसपोर्ट

केरल अपने इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को केवल एक ट्रायल प्रोजेक्ट से बदलकर अब एक फुल-स्केल कमर्शियल ऑपरेशन बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। स्टेट वॉटर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट जुलाई 2026 तक 6 नई सोलर-पावर्ड फेरियों को अपने बेड़े में शामिल करेगा, जो मुख्य रूप से अलाप्पुझा और एर्नाकुलम जैसे बड़े शहरों में काम करेंगी। भारत की पहली सोलर फेरी 'Aditya' की कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि बैटरी-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन पानी के रास्ते सफर के लिए न सिर्फ तकनीकी रूप से सक्षम है, बल्कि फाइनेंशियल तौर पर भी फायदेमंद है।

माल ढुलाई में भी क्रांति

कोच्चि की कंपनी Navalt, जिसने पुरानी सोलर फेरियां डिजाइन की थीं, अब 100 टन क्षमता वाली रो-रो (Roll-on/Roll-off) नौकाएं तैयार कर रही है। ये जहाज सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि कंटेनर ट्रकों और कारों जैसे भारी सामान को ढोने के लिए बनाए गए हैं। इसका सीधा लक्ष्य केरल के बैकवाटर्स का उपयोग करके हाईवे पर बढ़ते ट्रकों के ट्रैफिक को कम करना है।

चुनौतियां और चुनौतियां (Operational Hurdles)

सोलर-इलेक्ट्रिक शिपिंग का मॉडल सुनने में भले ही सस्ता लगे, लेकिन इसे चलाना आसान नहीं है। डीजल जहाजों के मुकाबले इन्हें हाई-स्पीड चार्जिंग स्टेशन की लगातार जरूरत होती है। यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी होती है, तो पूरी सर्विस रुक सकती है। इसके अलावा, भारी कार्गो जहाजों के लिए वॉटरवेज की गहराई बनाए रखने हेतु नियमित 'ड्रेजिंग' (Dredging) का काम भी एक बड़ा खर्च और लॉजिस्टिक चुनौती है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ती डिमांड

Navalt का केवल डिजाइनिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक पहुंचना भारतीय समुद्री इंजीनियरिंग के लिए एक बड़ा कदम है। कंपनी अब तक देश भर में लगभग 80 जहाज तैनात कर चुकी है और कनाडा, मालदीव और सेशेल्स जैसे देशों में भी उन्हें कॉन्ट्रैक्ट्स मिले हैं। राज्य सरकार की कोशिश है कि ये जहाज मौजूदा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनें और सड़क मार्ग पर निर्भरता को कम करें। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह प्रोजेक्ट तय समय सीमा में पूरा हो पाता है और क्या लंबी अवधि में फ्यूल और मेंटेनेंस की बचत से इसका बिजनेस मॉडल वाकई मुनाफे वाला साबित होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.