केरल ने NH 66 पर **622 किमी** लंबा इलेक्ट्रिक ट्रक कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट के पहले फेज में **₹19 करोड़** के निवेश से **12.5 MW** का चार्जिंग नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो देश में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक नया ब्लूप्रिंट साबित होगा।
केरल सरकार ने कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक फैले नेशनल हाईवे 66 के 622 किमी लंबे स्ट्रेच को देश के पहले इलेक्ट्रिक ट्रक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का ब्लूप्रिंट पेश किया है। इंडिया क्लीन ट्रांसपोर्ट समिट 2026 में इस पहल का अनावरण किया गया, जिसका मकसद हैवी-ड्यूटी लॉजिस्टिक्स को डीजल से इलेक्ट्रिक की ओर शिफ्ट करना है।
ग्रीन लॉजिस्टिक्स का नया रास्ता
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नेतृत्व 'केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड' और 'इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन' मिलकर कर रहे हैं। चार्जिंग स्टेशनों की सही लोकेशन चुनने के लिए 13,000 से अधिक ट्रकों के मूवमेंट पैटर्न और टोल प्लाजा डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया है। कोच्चि, कोझिकोड और कोल्लम जैसे प्रमुख शहरों को चार्जिंग हब के रूप में चुना गया है ताकि भविष्य में आने वाली तकनीकी बाधाओं को कम किया जा सके। इस पूरे काम को केंद्र सरकार की PM E-DRIVE योजना के तहत वित्तीय सहायता मिल रही है।
2050 तक का विजन
सरकार ने इसे लेकर 30 साल का रोडमैप तैयार किया है। साल 2050 तक इस पूरे कॉरिडोर पर लगभग 2,000 चार्जर लगाने की योजना है, जिनकी कुल क्षमता 204.5 MW होगी। अच्छी बात यह है कि राज्य की कुल सालाना बिजली खपत में इसका हिस्सा 0.2% से भी कम रहने का अनुमान है, जिससे मौजूदा पावर ग्रिड पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि, प्रोजेक्ट के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। इलेक्ट्रिक ट्रकों की कीमत अभी भी डीजल ट्रकों के मुकाबले काफी ज्यादा है और उनकी रेंज एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशनों के लिए जमीन अधिग्रहण में देरी और हाई-ट्रैफिक हब पर ग्रिड मैनेजमेंट को दुरुस्त रखना राज्य के लिए बड़ी परीक्षा होगी। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कितनी तेजी से लॉजिस्टिक्स कंपनियां इस इलेक्ट्रिक बदलाव को अपनाती हैं।
