केरल सरकार ने 'Kerala Civil Aviation Development Cooperative Society' को एयरलाइन चलाने की अनुमति दे दी है। भारत के को-ऑपरेटिव सेक्टर के लिए यह एक बड़ा और नया कदम है।
को-ऑपरेटिव मॉडल का नया प्रयोग
केरल सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार कोई को-ऑपरेटिव सोसाइटी एविएशन सेक्टर में कदम रख रही है। इस प्रोजेक्ट को C N Vijayakrishnan लीड कर रहे हैं, जो MVR कैंसर सेंटर से भी जुड़े हैं। को-ऑपरेटिव मॉडल को अब तक कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में सफलता मिली है, लेकिन अब इसे ट्रांसपोर्टेशन जैसी हाई-रिस्क इंडस्ट्री में आजमाया जा रहा है।
एविएशन की राह आसान नहीं
एविएशन सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) है। सफलता के लिए इस नई कंपनी को Directorate General of Civil Aviation से 'एयर ऑपरेटर परमिट' हासिल करना होगा। इसके अलावा, एयरक्राफ्ट लीजिंग और फ्यूल जैसे फिक्स्ड खर्चों को मैनेज करना और पहले से मौजूद दिग्गज एयरलाइन्स से मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
डिपॉजिट पर सुरक्षा की गारंटी
इसी के साथ राज्य सरकार ने को-ऑपरेटिव सेक्टर में रखे गए डिपॉजिट्स (Deposits) के लिए गारंटी देने का ऐलान किया है। इसका मकसद को-ऑपरेटिव बैंकिंग नेटवर्क में पब्लिक का भरोसा बढ़ाना है, ताकि बैंकिंग सिस्टम को और मजबूती मिल सके।
रेगुलेटरी निगरानी पर सख्ती
राज्य के मुख्यमंत्री V D Satheesan ने इस विस्तार का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही कड़े तेवर भी अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पब्लिक फंड के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का जोर इस बात पर है कि को-ऑपरेटिव संस्थाएं नए बिजनेस में कदम रखें लेकिन वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) के साथ। आने वाले समय में कंपनी को अपने फ्लीट एक्विजिशन और फंडिंग स्ट्रक्चर पर विस्तार से काम करना होगा।
