कर्नाटक सरकार अपने चार स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के घाटे को कम करने के लिए बस किराया बढ़ाने पर विचार कर रही है। 'शक्ति' (Shakti) फ्री ट्रेवल स्कीम के चलते बढ़ते वित्तीय दबाव और परिचालन लागत (Operational Cost) को देखते हुए पूर्व IAS अधिकारी अतुल तिवारी की अध्यक्षता में एक कमिटी प्रस्ताव की जांच कर रही है।
कर्नाटक सरकार स्टेट-रन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन जैसे KSRTC, BMTC, NWKRTC और KKRTC में किराए को रिवाइज करने की संभावना तलाश रही है। इन निकायों पर सर्विस और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का भारी दबाव है, जिसके लिए रिटायर्ड IAS अधिकारी अतुल तिवारी के नेतृत्व में एक कमिटी गठित की गई है।
क्यों पड़ रही है किराए में बढ़ोतरी की जरूरत?
किराया बढ़ाने की मुख्य वजह बढ़ती फ्यूल कीमतें और मेंटेनेंस का खर्च है। जून 2023 में लॉन्च की गई 'शक्ति' स्कीम, जिसके तहत महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है, अब तक 797 करोड़ से ज्यादा यात्राएं दर्ज कर चुकी है। इस स्कीम के कारण कॉरपोरेशन पर ₹5,600 करोड़ का बकाया रीइम्बर्समेंट (Reimbursement) का बोझ है, जिससे नए फंड या रिवेन्यू एडजस्टमेंट की जरूरत पड़ गई है।
मॉडर्नाइजेशन और नई चुनौतियां
सरकार का फोकस सिर्फ घाटे पर नहीं बल्कि मॉडर्नाइजेशन पर भी है। सितंबर 2026 की शुरुआत में, कर्नाटक कैबिनेट ने केंद्र सरकार के PM E-DRIVE प्रोग्राम के तहत 4,500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने को मंजूरी दी है। यह बड़ा कैपिटल इन्वेस्टमेंट भविष्य में फ्यूल खर्च कम करने में मदद करेगा, लेकिन फिलहाल ऑपरेशनल लॉस और फ्लीट अपग्रेड की फंडिंग के बीच राज्य के ट्रांसपोर्ट सेक्टर के सामने एक बड़ा 'क्रिटिकल मोड़' है।
अब सबकी नजरें अतुल तिवारी की अध्यक्षता वाली कमिटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या सरकार किराए में बढ़ोतरी का कड़ा फैसला लेगी, यह देखना बाकी है।
