Karnataka Maritime Board ने अब अपने तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल की राह पकड़ ली है। इसका मकसद शिपबिल्डिंग और लॉजिस्टिक्स को रफ्तार देना है, जबकि MRPL जैसे बड़े इंडस्ट्रियल प्लेयर्स ने बड़े जहाजों के लिए पोर्ट्स की गहराई बढ़ाने की मांग की है।
कर्नाटक मैरीटाइम बोर्ड अब राज्य के तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने की तैयारी में है। बोर्ड का पूरा जोर अब केवल पोर्ट कैपेसिटी बढ़ाने पर नहीं, बल्कि एक एडवांस लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, स्पेशलाइज्ड शिपबिल्डिंग फैसिलिटी और डिजिटल कनेक्टिविटी तैयार करने पर है। फिलहाल राज्य में एक मेजर पोर्ट और 13 माइनर पोर्ट्स हैं, जहां प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के जरिए लॉजिस्टिक लागत को घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
नई योजनाओं का रोडमैप
बोर्ड ने कई प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में रखे हैं, जिसमें उत्तर कन्नड़ जिले में एक मल्टी-पर्पज पोर्ट और शिपबिल्डिंग यूनिट शामिल है। इसके अलावा, उडुपी में भी एक नया शिपयार्ड बनाने की योजना है। सिर्फ भारी उद्योगों तक सीमित न रहकर, बोर्ड मंगलुरु में वॉटर मेट्रो और रीजनल फेरी सर्विसेज जैसे अर्बन मोबिलिटी प्रोजेक्ट्स पर भी विचार कर रहा है।
MRPL की बड़ी मांग
औद्योगिक उपयोग के नजरिए से देखें तो यह बदलाव बहुत जरूरी है। Mangalore Refinery and Petrochemicals Ltd (MRPL), जो New Mangalore Port Authority के कुल कार्गो का 40% से 45% हिस्सा संभालती है, ने इंफ्रा अपग्रेड पर जोर दिया है। रिफाइनरी के अनुसार, मौजूदा 14 मीटर की ड्राफ्ट लिमिट कम है और बड़े जहाजों के लिए इसे गहराई बढ़ाना अनिवार्य है, ताकि इंटरनेशनल ट्रेड की लागत को कम किया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव का सफल होना एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस और भूमि अधिग्रहण जैसे चुनौतीपूर्ण फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। हालांकि, PPP मॉडल से सरकारी खजाने पर दबाव कम होगा, लेकिन निवेशकों को अब प्रोजेक्ट टेंडर की प्रोग्रेस और प्राइवेट पार्टनर्स के साथ होने वाले एग्रीमेंट्स पर नजर रखनी होगी। आने वाले क्वार्टर्स में बड़े इंडस्ट्रियल प्लेयर्स के मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि यह बदलाव कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन को कितनी मजबूती देता है।
