कर्नाटक सरकार ने राज्य में संचालित बस निगमों के किराए में **23% से 35%** तक की बढ़ोतरी कर दी है। **4 नवंबर 2026** से लागू हो रहे इस फैसले के पीछे डीजल की बढ़ती कीमतें और कर्मचारियों का वेतन भुगतान बड़ी वजह है। निगमों पर कुल घाटा **₹10,200 करोड़** के पार पहुंच चुका है।
कर्नाटक सरकार ने अपने चार प्रमुख परिवहन निगमों—KSRTC, NWKRTC, KKRTC और BMTC के किराए में आधिकारिक तौर पर वृद्धि कर दी है। यह बदलाव 4 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है। क्षेत्रीय परिवहन सेवाओं में किराए में लगभग 23% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि बेंगलुरु की BMTC सिटी बसों के लिए किराया 33% से 35% तक बढ़ा दिया गया है।
घाटे का गणित
इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण राज्य संचालित परिवहन निगमों की नाजुक आर्थिक स्थिति है। इन निगमों का कुल घाटा बढ़कर करीब ₹10,200 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं, जैसे कि महिलाओं के लिए 'शक्ति' (Shakti) प्रोग्राम, की लगभग ₹6,300 करोड़ की प्रतिपूर्ति (reimbursement) अभी भी लंबित है, जिससे निगमों का कैश फ्लो बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें?
परिवहन निगमों की बैलेंस शीट पर खर्च का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। डीजल की कीमतों में तेजी और कर्मचारियों की सैलरी व डीए (Dearness Allowance) के बढ़ते बोझ ने पुरानी किराया व्यवस्था को पूरी तरह से 'अनसस्टेनेबल' बना दिया था। बिना इस राजस्व वृद्धि के, रोजाना का संचालन और फ्लीट का मेंटेनेंस करना मुश्किल होता जा रहा था।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'शक्ति' स्कीम जारी रहेगी, लेकिन इस बढ़ोतरी का असर आम यात्रियों की संख्या (ridership) पर पड़ना तय है। निगमों पर अभी भी लगभग ₹9,912 करोड़ का भारी कर्ज है। लंबी अवधि में इन संस्थाओं की वित्तीय सेहत इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बिना सरकारी मदद के अपने बेड़े का आधुनिकीकरण और कर्ज का प्रबंधन कैसे करती हैं।
