हाल ही में शुरू हुआ **63 किलोमीटर** लंबा Kanpur-Lucknow Expressway अब फिर से बनाया जाएगा। जमीन धंसने और डिजाइन में खामियों के चलते प्रशासन ने टोल वसूली पर रोक लगा दी है, जिससे इसके डेवलपर PNC Infratech पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जो कुछ ही समय पहले आम जनता के लिए खोला गया था, अब एक बड़ी मुश्किल में फंस गया है। उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर सड़क धंसने और सतह खिसकने की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की शुरुआती जांच में पता चला है कि यह समस्या खराब मटेरियल के कारण नहीं, बल्कि मिट्टी की स्थिति और ड्रेनेज सिस्टम की गलत प्लानिंग का नतीजा है।
NHAI का सख्त एक्शन
NHAI ने अनन्वा (Unnao) के पास के प्रभावित हिस्सों को बेस लेवल से फिर से बनाने का आदेश दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सड़क को सुरक्षित होने तक टोल वसूली को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
PNC Infratech पर क्या असर?
इस प्रोजेक्ट को विकसित करने वाली कंपनी PNC Infratech के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ टोल से आने वाली कमाई रुक गई है, तो दूसरी तरफ दोबारा निर्माण का खर्च कंपनी के मार्जिन पर असर डालेगा। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसे अभी तक किसी प्रोजेक्ट से बाहर नहीं किया गया है और वह मेंटेनेंस नियमों के तहत काम कर रही है, लेकिन इस घटना से रेगुलेटरी स्क्रूटनी काफी बढ़ गई है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
यह पूरा प्रोजेक्ट 'हाइब्रिड एन्युटी मॉडल' (HAM) के तहत बना था। सरकार अब साइट असेसमेंट के नियमों की समीक्षा कर रही है, जिसका सीधा असर कंपनी की भविष्य की बोली लगाने की क्षमता और साख पर पड़ सकता है। निवेशकों को कंपनी के उन कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए, जिसमें वे रिपेयर के खर्च और कैश फ्लो पर होने वाले असर के बारे में जानकारी देंगे।
