प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल खोला है, जो सालाना 20 लाख यात्रियों को संभाल सकता है। साथ ही, सरकार ने अगले 10 साल के लिए ₹28,840 करोड़ की लागत वाली संशोधित UDAN स्कीम लॉन्च की है, जिसका मकसद 100 रीजनल हवाई अड्डों को विकसित करना और हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल का क्या है खास?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जोधपुर एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल का उद्घाटन किया। यह टर्मिनल ₹400 करोड़ से ₹480 करोड़ की लागत से बना है और 2.5 लाख वर्ग फुट में फैला है। इसे एक साल में 20 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है।
संशोधित UDAN स्कीम: 10 साल में ₹28,840 करोड़ का निवेश
इसी मौके पर, सरकार ने 'उड़े देश का आम नागरिक' (UDAN) स्कीम का संशोधित वर्जन लॉन्च किया है। अगले 10 सालों के लिए इस स्कीम पर कुल ₹28,840 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसका मुख्य लक्ष्य देश भर में रीजनल हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
इस प्लान के तहत, 100 पुराने और कम इस्तेमाल होने वाले एयरस्ट्रिप्स को पूरी तरह से चालू हवाई अड्डों में बदला जाएगा, जिसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹12,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश होगा। साथ ही, ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए ₹2,500 करोड़ और वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के लिए ₹10,000 करोड़ से ज्यादा रखे गए हैं। VGF का मतलब है कि कम लोकप्रिय रीजनल रूट्स पर एयरलाइंस को उड़ानें चलाने में मदद के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।
रीजनल कनेक्टिविटी और बिजनेस पर असर
पिछले 12 सालों में जोधपुर में हवाई यातायात दोगुना हुआ है, और अब यहां सालाना 10 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। नए टर्मिनल से प्रति घंटे 1,000 यात्रियों को संभालने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे टूरिज्म और लोकल बिजनेस को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश भर में, यह स्कीम घरेलू स्तर पर बने एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देगी, जो 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप है।
किन कंपनियों को फायदा?
इस प्रोजेक्ट का सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर पड़ेगा। कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग कंपनियां, जैसे कि Larsen & Toubro (L&T) और अन्य इंफ्रा-फोक्स्ड फर्मों को एयरपोर्ट डेवलपमेंट के बड़े प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। इसके अलावा, रीजनल एयरलाइंस और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) कंपनियों के लिए भी एक स्थिर माहौल बनेगा। सरकार के ₹28,000 करोड़ से ज्यादा के निवेश से एयरपोर्ट ऑपरेटर्स और सिविल कंस्ट्रक्शन फर्मों की रेवेन्यू विजिबिलिटी लॉन्ग-टर्म में बढ़ सकती है।
जोखिम क्या हैं?
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ने या जमीन अधिग्रहण और अप्रूवल में देरी जैसे रिस्क हो सकते हैं। UDAN स्कीम की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि क्या रीजनल रूट्स लंबे समय तक सरकारी सहायता के बिना खुद को संभाल पाएंगे। अगर इन छोटे रूट्स पर यात्री मांग उम्मीद से कम रहती है, तो सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।
