Jewar Airport: अब बस कुछ ही दिन दूर!
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) को DGCA (Directorate General of Civil Aviation) से अपना एयरोड्रॉम लाइसेंस मिल गया है, जो इसके जल्द ही चालू होने का संकेत है। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले 45 दिनों में बाकी की तैयारियां पूरी हो जाएंगी, जिससे घरेलू यात्री और कार्गो फ्लाइट्स के साथ कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हो सकेंगे। फेज 1 में सालाना 12 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी, जबकि पहले साल 6-8 मिलियन यात्री आने की उम्मीद है। साल 2030 तक यह आंकड़ा 30 मिलियन और लंबी अवधि में 70 मिलियन तक पहुंच सकता है। एयरपोर्ट का कार्गो टर्मिनल सालाना 100,000 टन से अधिक कार्गो को संभालने का लक्ष्य रखेगा।
NCR के लिए ₹3,630 करोड़ का एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट
इस एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय कैबिनेट ने 31.42 किमी लंबे ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी कॉरिडोर के लिए ₹3,630.77 करोड़ के संशोधित कैपिटल कॉस्ट को मंजूरी दी है। यह एक्सप्रेसवे जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसे हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 11 किमी का एलिवेटेड (elevated) सेक्शन भी शामिल होगा। यह कॉरिडोर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) जैसे प्रमुख नेटवर्कों से भी जुड़ेगा। हरियाणा सरकार इस एलिवेटेड हिस्से के लिए ₹450 करोड़ का योगदान देगी।
लॉजिस्टिक्स हब बनने की राह पर NCR
यह इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट NCR को एक बड़े मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सेंटर के तौर पर स्थापित करेगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास में तेजी आ सकती है। यह डेवलपमेंट भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिसके साल 2035 तक $1.2 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। 1,386 किमी लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भी दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को घटाकर 12 घंटे कर देगा। सरकार का लक्ष्य भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 16% से घटाकर चीन की 8% के करीब लाना है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने FY 2024-25 में ₹7,233.28 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो सेक्टर की मजबूती दिखाता है। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर FY 2025-26 में ₹11.21 लाख करोड़ (GDP का 3.1%) है।
क्या हैं चुनौतियाँ?
एक्सप्रेसवे की लागत में ₹3,630.77 करोड़ का इजाफा शुरुआती अनुमानों से अधिक है, जो भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ने (cost overruns) के आम जोखिम को दर्शाता है। अप्रैल 2024 तक 448 प्रोजेक्ट्स में ₹5.55 लाख करोड़ का ओवररन दर्ज किया गया है। HAM मॉडल में सरकार से समय पर भुगतान न मिलने पर लिक्विडिटी (liquidity) की समस्या खड़ी हो सकती है। एयरपोर्ट के अनुमानित यात्री और कार्गो वॉल्यूम महत्वाकांक्षी हैं, और इनमें देरी से एक्सप्रेसवे की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। भूमि अधिग्रहण और नियामक मंजूरी में ऐतिहासिक देरी भी एक चुनौती बनी हुई है।
भविष्य का नज़ारा
यह नया एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के साथ मिलकर NCR को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स हब बनाएगा। इससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी (efficiency) बढ़ेगी, ट्रांजिट लागत कम होगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। यह PM Gati Shakti जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस बना हुआ है, और FY 2026 तक ₹12.2 ट्रिलियन के अनुमानित खर्च के साथ, ऐसे प्रोजेक्ट्स भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देंगे।