संपत्ति की बिक्री से बड़ी राहत
Jet Airways के लिक्विडेशन (liquidation) की प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव पार हो गया है। माल्टा की कंपनी Ace Aviation, जो Challenge Group की सहायक कंपनी है, ने Jet Airways के दो बोइंग 777-300ER विमानों का अधिग्रहण फाइनल कर लिया है। इन विमानों की कीमत करीब ₹568.18 करोड़ है। ये बड़े विमान दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयरलाइन के ऑपरेशन्स बंद करने, यानी अप्रैल 2019 से ही खड़े थे। इनकी खरीद ई-ऑक्शन (e-auction) के जरिए BAANKNET प्लेटफॉर्म पर हुई।
यह पहली बार नहीं है जब Ace Aviation ने Jet Airways से विमान खरीदे हों। इससे पहले, 2026 की शुरुआत में इसी खरीदार ने तीन और बोइंग 777 विमान 46 मिलियन डॉलर में खरीदे थे। अब इन खरीदे गए विमानों को कार्गो (cargo) प्लेन में बदला जाएगा, जिससे Challenge Group के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी।
कानूनी अड़चनें और मुश्किलें
यह डील इतनी आसानी से नहीं हुई। Jet Airways की लिक्विडेशन प्रक्रिया सालों से चली आ रही है और इसमें कई कानूनी अड़चनें आईं। एक दूसरी बिडिंग कंपनी, Industrial Asset Transaction Services Private Limited, ने इस डील को रोकने की कोशिश की थी। उनका आरोप था कि Ace Aviation को गलत तरीके से जानकारी मिली और बिडिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी।
हालांकि, मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। NCLT ने स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन कमेटी (Stakeholders’ Consultation Committee) के फैसलों को सही ठहराया। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) और सुप्रीम कोर्ट ने भी NCLT के फैसले को बरकरार रखा, जिससे इन कीमती संपत्तियों की बिक्री का रास्ता साफ हो गया।
दिवालिया होने की कड़वी सच्चाई
Jet Airways का यह केस कॉर्पोरेट दिवालियापन और संपत्ति की वैल्यू कम होने का एक बड़ा उदाहरण है। एयरलाइन को फिर से शुरू करने की कई कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद नवंबर 2024 में कोर्ट ने इसे लिक्विडेट करने का आदेश दिया। एयरपोर्ट्स पर खड़े विमानों के पार्किंग और मेंटेनेंस का भारी बिल भी लिक्विडेशन एस्टेट पर एक बड़ा बोझ है। इतने सालों से चली आ रही इस प्रक्रिया के कारण, कंपनी के कर्मचारियों और टिकट रिफंड का इंतजार कर रहे ग्राहकों जैसे क्रेडिटर्स के लिए रिकवरी की उम्मीदें काफी कम हो गई हैं।
आगे का रास्ता
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, अब Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत फंड बांटने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा रहा है। NCLT ने भुगतान शुरू करने के निर्देश दिए हैं, भले ही कुछ प्राथमिकता संबंधी विवाद अभी भी लंबित हों। जैसे-जैसे लिक्विडेटर पूर्व की इस प्रमुख एयरलाइन के बचे हुए हिस्सों की नीलामी कर रहा है, एविएशन इंडस्ट्री इन बिक्री को एयरलाइन के दोबारा शुरू होने के संकेत के रूप में नहीं, बल्कि भारत के सबसे जटिल कॉर्पोरेट पतन में से एक को सुलझाने के अंतिम और आवश्यक कदमों के रूप में देख रही है।
