यात्रियों को झेलनी पड़ रही है मुश्किल यात्रा
संघर्ष के चलते कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्री उड़ानों का संचालन सस्पेंड कर दिया गया है। इस वजह से Jazeera Airways 26 मार्च, 2026 से अपनी सभी भारत की उड़ानों को Dammam, सऊदी अरब से ऑपरेट करेगी। यात्रियों को अब कुवैत से Dammam तक जमीन के रास्ते सफर करना होगा, जिसमें बॉर्डर चेक और ट्रांजिट वीजा जैसी जटिलताएं शामिल हैं। एयरलाइन को उम्मीद है कि यह व्यवस्था लगभग एक साल तक चल सकती है, भले ही लड़ाई बंद हो जाए।
लाखों भारतीयों के लिए 'जीवन रेखा' बनी एयरलाइन
फरवरी के अंत से कुवैत का एयरस्पेस बंद है, ऐसे में Jazeera Airways कुवैत में रहने वाले 10 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण लिंक बनी हुई है। इससे पहले IndiGo, Air India Express और Akasa Air जैसी एयरलाइंस कुवैत के लिए अपनी उड़ानें पहले ही बंद कर चुकी थीं। Jazeera Airways ने भारतीय सरकार से चार और भारतीय शहरों के लिए अस्थायी उड़ानें संचालित करने की मंजूरी मांगी है, जो इस रूट की भारी मांग को दर्शाता है। इस बीच, Gulf Air जैसी अन्य एयरलाइंस भी बहरीन में एयरस्पेस की दिक्कतों के चलते Dammam के जरिए भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अपनी फ्लाइट्स ऑपरेट कर रही हैं।
मुनाफे के बावजूद बढ़ी वित्तीय चुनौतियां
Jazeera Airways ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता कंपनी के लिए बड़े जोखिम पैदा कर रही है। एयरलाइन का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 363.25% है, जो ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने पर एक कमजोरी साबित हो सकता है। संघर्ष के चलते ईंधन की कीमतें कुछ मामलों में दोगुनी हो गई हैं, जिससे ऑपरेटिंग कॉस्ट में भारी इजाफा हुआ है। लंबी दूरी की फ्लाइट्स और जटिल ट्रांजिट लॉजिस्टिक्स के कारण परिचालन लागत और भी बढ़ गई है, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
क्या हैं एयरलाइन के लॉन्ग-टर्म प्लान्स और इंडस्ट्री का क्या है कहना?
Jazeera Airways के CEO, Barathan Pasupathi का मानना है कि यह वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था एक साल तक जारी रह सकती है। एयरलाइन नए विमानों की डिलीवरी 2026 से शुरू होने के साथ नेटवर्क विस्तार की भी योजना बना रही है। वर्तमान संकट GCC क्षेत्र में एयरलाइंस के लिए कई परिचालन हब की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति को तेज कर सकता है। एविएशन सेक्टर की मजबूती का इम्तिहान हो रहा है, क्योंकि विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष जारी रहने पर अस्थिरता और वैश्विक हवाई यातायात पैटर्न में स्थायी बदलाव का खतरा बना रहेगा।