30 सितंबर 2026 की सुरक्षा घटना के बाद Israel ने बड़ा फैसला लिया है। अब उन 31 देशों के फ्लाइट क्रू को देश की एयरस्पेस में एंट्री नहीं मिलेगी, जिनके साथ Israel के कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। इससे ग्लोबल एयरलाइंस के लिए ऑपरेशनल चुनौती खड़ी हो गई है।
Israel के ट्रांसपोर्ट और रोड सेफ्टी मंत्रालय ने एक नया कड़ा नियम लागू किया है। 30 सितंबर 2026 को एक Omani को-पायलट से जुड़ी सुरक्षा घटना के बाद, अब उन देशों के नागरिक, जिनके Israel के साथ कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, देश की एयरस्पेस में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। यह नियम उन क्रू मेंबर्स पर भी लागू होता है जिनके पास इन देशों की नागरिकता या दोहरी नागरिकता है।
एयरलाइंस पर बढ़ता दबाव
Air France और United Airlines जैसी दिग्गज एयरलाइंस को अब अपनी क्रू-प्लानिंग सॉफ्टवेयर और वर्किंग पॉलिसी में बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं। एयरलाइंस को हर उस क्रू मेंबर की बैकग्राउंड चेकिंग करनी होगी जो Israel जाने वाली फ्लाइट्स पर तैनात हैं। यदि यात्रा के दौरान कोई भी क्रू मेंबर इन मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो फ्लाइट को डायवर्ट करना पड़ सकता है, जिससे फ्यूल कॉस्ट, एयरपोर्ट फीस और पैसेंजर मुआवजे का भारी खर्च एयरलाइंस को उठाना पड़ेगा।
निवेशक क्यों रहें सतर्क?
Ethiopian Airlines जैसी फ्लाइट्स का हालिया डायवर्जन यह साबित करता है कि नियम जमीन पर सख्ती से लागू हैं। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि एयरलाइंस का प्रॉफिट मार्जिन पहले ही बहुत पतला है। अब स्टाफ रोटेशन की पेचीदगियां और फ्लाइट्स के देरी होने का रिस्क सीधे कंपनी की बैलेंस शीट पर असर डाल सकता है।
कानूनी और लेबर विवाद का खतरा
यह मामला अब कानूनी पेच में भी फंसता दिख रहा है। कई देशों में लेबर यूनियन ने तर्क दिया है कि दोहरी नागरिकता का खुलासा करने के लिए मजबूर करना निजता के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। यदि यह मामला कोर्ट तक जाता है, तो एयरलाइंस को कानूनी खर्चों के साथ-साथ भारी रिप्यूटेशन लॉस का सामना भी करना पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब यह देख रहे हैं कि क्या एयरलाइंस Tel Aviv के लिए अपनी फ्लाइट्स की फ्रीक्वेंसी घटाएंगी या नहीं।
