InterGlobe Aviation (IndiGo) ने घरेलू फ्लाइट कैपेसिटी में **5% से 7%** की कटौती की है। इसकी मुख्य वजह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार दूसरे महीने हुई बढ़ोतरी है, जो अब **₹121.28** प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
IndiGo के नाम से जानी जाने वाली InterGlobe Aviation अब अपनी घरेलू उड़ानों में कटौती कर रही है। कंपनी ने अपनी क्षमता में 5% से 7% तक की कमी की है और हिंडन टर्मिनल से नवी मुंबई, कोलकाता और वाराणसी जाने वाले कुछ रूट्स पर उड़ानों की फ्रीक्वेंसी भी कम कर दी है। ईंधन की लागत बढ़ने से कंपनी पर बढ़ रहे वित्तीय दबाव को देखते हुए यह एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
फ्यूल कॉस्ट का भारी दबाव
सरकारी तेल कंपनियों ने 1 सितंबर, 2026 से ATF की कीमतों में 5.46% का इजाफा कर दिया है, जिससे इसके दाम ₹121.28 प्रति लीटर हो गए हैं। विमानन कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उनके कुल ऑपरेटिंग खर्च का 40% से 60% हिस्सा केवल ईंधन में ही चला जाता है। इसका असर IndiGo के हालिया नतीजों में भी दिखा, जहां Q1 FY27 में कंपनी को ₹238 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जिसका मुख्य कारण फ्यूल कॉस्ट में सालाना 85.7% का उछाल था।
विस्तार के बजाय अब दक्षता पर जोर
इंडस्ट्री में अब एक बदलाव देखने को मिल रहा है। एयरलाइंस अब आक्रामक विस्तार के बजाय उन रूट्स पर फोकस कर रही हैं जो मुनाफे वाले हैं। सितंबर 2026 में भारतीय विमानन क्षेत्र में कुल शेड्यूल्ड सीट्स में 4.5% की गिरावट दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि पूरा सेक्टर अब अपने नेटवर्क को बेहतर बनाने में जुटा है।
भविष्य के जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि मार्जिन पर यह दबाव कब तक रहेगा। गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली जैसे फेस्टिव सीजन के करीब होने के कारण, उड़ानों की संख्या कम होने से टिकटों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और पैसेंजर ग्रोथ भी सीमित हो सकती है। इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल अस्थिरता, क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पायलटों की कमी और US FAA जैसे रेगुलेटरी ऑडिट्स भी एयरलाइन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
