InterGlobe Aviation (Indigo) और Air India के टॉप अधिकारियों को **2 नवंबर** को संसदीय समिति के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। कंपनी के ऑपरेशनल मानकों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बीच, एविएशन सेक्टर पर रेगुलेटरी दबाव बढ़ता दिख रहा है।
संसदीय समिति की ओर से यह बैठक एविएशन सेक्टर की ऑपरेशनल हेल्थ को परखने के लिए बुलाई गई है। इसमें न केवल एयरलाइंस के अधिकारी शामिल होंगे, बल्कि ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह साफ संकेत है कि सरकार कमर्शियल परफॉर्मेंस और सुरक्षा मानकों, दोनों पर बारीकी से नजर रख रही है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह समय 'हाई रेगुलेटरी ऑब्जर्वेशन' का है। एक तरफ संसद की यह समीक्षा हो रही है, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को 16 नवंबर तक एयरफेयर प्राइसिंग (टिकट कीमतों) पर स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार करने का आदेश दिया है।
मार्जिन पर दबाव का डर
सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में टिकट कीमतों या ऑपरेशनल नियमों को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी? अगर ऐसा होता है, तो एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। InterGlobe Aviation, जो कि भारत में एकमात्र मेजर लिस्टेड एयरलाइन है, उसके लिए सरकारी पॉलिसी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है।
आने वाले दिनों में इस बैठक के नतीजे और सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन, दोनों ही घरेलू एयरलाइंस के लिए रेगुलेटरी माहौल तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
