कनेक्टिविटी इंजन का नया फेज
भारत सरकार ने UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) स्कीम को अगले दशक यानी फाइनेंशियल ईयर 2026-27 से 2035-36 तक के लिए ₹28,840 करोड़ के बड़े बजट के साथ हरी झंडी दिखा दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को पूरी तरह से बदलना है। इसके तहत, देश भर में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड का निर्माण किया जाएगा, खासकर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों पर खास ध्यान दिया जाएगा। एयरपोर्ट डेवलपमेंट के लिए ₹12,159 करोड़ और हेलीपैड के लिए ₹3,661 करोड़ आवंटित किए गए हैं। साथ ही, लगभग 441 हवाई अड्डों के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए ₹2,577 करोड़ रखे गए हैं। एयरलाइन ऑपरेटर्स को वियबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के तौर पर स्कीम की अवधि में ₹10,043 करोड़ दिए जाएंगे, जो कम रेवेन्यू वाले रूट्स को चालू रखने के लिए बेहद जरूरी है।
स्वदेशी एयरोस्पेस का बूस्ट
इस नए UDAN प्लान का एक अहम हिस्सा 'आत्मनिर्भर भारत' विजन से भी जुड़ा है। सरकार छोटे फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों की कमी को पूरा करने के लिए स्वदेशी विमानों की खरीद पर भी जोर दे रही है। इसके तहत, पवन हंस के लिए HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के 2 ध्रुव हेलीकॉप्टर और अलायंस एयर के लिए 2 HAL डोर्नियर एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे। सरकारी कंपनी HAL इस रणनीति में अहम भूमिका निभाएगी। सितंबर 2025 तक HAL के पास ₹2.59 लाख करोड़ से अधिक का ऑर्डर बुक है, जो आने वाले सालों के लिए अच्छी कमाई का संकेत देता है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट HAL के 27.46x के PE रेश्यो को थोड़ा महंगा मान रहे हैं।
सेक्टर की चुनौतियां और वैल्यूएशन पहेली
लेकिन, इस बड़े सरकारी निवेश के बावजूद, भारतीय एविएशन सेक्टर इस वक्त कुछ मुश्किलों से गुजर रहा है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY2026 में सेक्टर को ₹170-180 बिलियन का नेट लॉस हो सकता है। यात्री ग्रोथ में भी कमी आई है, जिसे FY2026 के लिए 0-3% तक सीमित कर दिया गया है। निफ्टी एविएशन इंडेक्स का PE रेश्यो अभी 20.0 है, जबकि HAL का PE करीब 27.46x है, जो पिछले 10 साल के औसत से 93% ज्यादा है। इन वैल्यूएशन को लेकर कुछ चिंताएं हैं, हालांकि एनालिस्ट HAL के लिए ₹5,179 के आसपास का मीडियन प्राइस टारगेट दे रहे हैं। रुपये का कमजोर होना और भू-राजनीतिक तनाव भी सेक्टर पर दबाव डाल रहे हैं, जिसका असर HAL के शेयर में भी देखने को मिला था, जो मार्च 2026 में 52-हफ्ते के निचले स्तर पर भी चला गया था।
वॉयबिलिटी पर सवाल
UDAN स्कीम के पिछले अनुभव बताते हैं कि यह चुनौतीपूर्ण रही है। फरवरी 2026 तक, इसने 663 रूट्स और 95 एयरपोर्ट/हेलीपोर्ट को चालू किया है, जिस पर 1.6 करोड़ से ज्यादा यात्री सफर कर चुके हैं। लेकिन, स्कीम के तहत यात्री यातायात में उतार-चढ़ाव देखा गया है। असली मुद्दा कम मांग वाले रूट्स पर प्रॉफिटेबिलिटी सुनिश्चित करना है। एयरलाइंस को मिलने वाली सरकारी मदद अक्सर 3 साल के लिए सीमित होती है, जिससे लंबे समय तक रूट सस्टेनेबिलिटी पर सवाल उठते हैं। पिछली फेज़ में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और धीमी इम्प्लीमेंटेशन जैसी समस्याएं भी सामने आई थीं। UDAN 2.0 के लिए यह भारी सरकारी आउटलेय इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने और मार्केट क्रिएट करने के लिए तो जरूरी है, लेकिन इसकी लंबी वॉयबिलिटी सरकार के लगातार सपोर्ट और डिमांड स्टिम्युलेशन पर टिकी रहेगी।
भविष्य की राह
यह विस्तारित UDAN योजना 'विकसित भारत 2047' के विजन से जुड़ी है, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक स्तर पर कॉम्पिटिटिव एविएशन इकोसिस्टम बनाना है। सरकार की प्रतिबद्धता और फाइनेंशियल सपोर्ट से टियर-2 और टियर-3 शहरों में कनेक्टिविटी, हेल्थकेयर और आर्थिक ग्रोथ बढ़ाने का लक्ष्य है। हालांकि, सेक्टर की फाइनेंशियल हेल्थ, अनुमानित लॉस और HAL की महंगी वैल्यूएशन एक कॉम्प्लेक्स आउटलुक पेश करती है। UDAN 2.0 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह रजनल रूट इकोनॉमिक्स की स्ट्रक्चरल चुनौतियों और इंडस्ट्री के साइक्लिकल प्रेशर्स को कितनी अच्छी तरह पार कर पाती है।