IndiGo, SpiceJet शेयर गिरे: कच्चा तेल $105 पार, PM मोदी की 'कंजूसी' की अपील से डोला बाजार

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AuthorAditya Rao|Published at:
IndiGo, SpiceJet शेयर गिरे: कच्चा तेल $105 पार, PM मोदी की 'कंजूसी' की अपील से डोला बाजार
Overview

**वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों के $105 प्रति बैरल के पार जाने के कारण**, शेयर बाजार में भारतीय एयरलाइंस कंपनियों के शेयर, खासकर IndiGo और SpiceJet, **4%** से ज्यादा लुढ़क गए। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती लागत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'कंजूसी' या कम खर्च करने की अपील ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

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बाजार में आई बिकवाली (Market Sell-off)

सोमवार को शेयर बाजार में भारतीय एविएशन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। InterGlobe Aviation (IndiGo) के शेयर 4.4% तक गिरकर ₹4,321.05 पर आ गए, जिससे कंपनी का मार्केट कैप ₹1.67 लाख करोड़ तक सिमट गया। वहीं, SpiceJet के शेयर 4% से ज्यादा टूटकर ₹13.41 पर पहुंच गए, और इसका मार्केट कैप ₹2,090 करोड़ रह गया।

इस बिकवाली की मुख्य वजह वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ रहा भू-राजनीतिक तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल $105 प्रति बैरल के पार निकल गया है। एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर कुल खर्च का 30-40% हिस्सा आता है, जो अब Federation of Indian Airlines (FIA) के अनुसार, ऑपरेशंस का 55-60% तक पहुंच गया है। हालांकि, मई 2026 के लिए ATF की घरेलू कीमतें सरकार के फैसले से अपरिवर्तित रहीं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय वाहकों के लिए इनमें 5% की बढ़ोतरी हुई।

एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति (Airline Financial Health)

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo का मार्केट कैप करीब ₹1.75 लाख करोड़ है। इसके शेयर का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 38.3 से 54.46 के बीच है, जो निवेशकों का भरोसा दिखाता है। इसके विपरीत, SpiceJet का मार्केट कैप लगभग ₹2,000-2,100 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो निगेटिव (-1.02 से -2.75) है, जो कंपनी के घाटे और वित्तीय संकट को दर्शाता है। आमतौर पर, IndiGo की लिक्विडिटी, सॉल्वेंसी और प्रॉफिटेबिलिटी SpiceJet की तुलना में काफी बेहतर रही है।

तेल की कीमतों का इतिहास (History of Oil Prices)

एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील है। मार्च 2026 की शुरुआत में, जब कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर गई थी, तब IndiGo और SpiceJet दोनों के शेयरों में 8% तक की गिरावट आई थी। वहीं, 10 मार्च 2026 को, जब तेल की कीमतें गिरी थीं और अमेरिकी-ईरान संघर्ष में समाधान की उम्मीद जगी थी, तब IndiGo 5.6% और SpiceJet 7.7% बढ़ा था।

अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर (Major Economic Impact)

भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है, और इसका एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। ऐसे में वेस्ट एशिया की अस्थिरता देश के लिए बड़ा जोखिम है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आयात बिल को बढ़ाती हैं, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव पड़ता है और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है। अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में हर $10 की बढ़ोतरी से महंगाई 0.2-0.25 percentage points बढ़ सकती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो FY27 में भारत की GDP ग्रोथ उम्मीद से कम होकर 6.5-6.8% तक रह सकती है, जो पहले 7.5% अनुमानित थी। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से 'कंजूसी' यानी खर्च कम करने और विदेशी यात्राएं घटाने की अपील की है, जो निकट भविष्य में आर्थिक विकास के लिए थोड़ा नकारात्मक संकेत है।

सेक्टर की कमजोरियां और भविष्य (Sector Weaknesses and Future)

बाजार की यह तेज प्रतिक्रिया भारतीय एविएशन सेक्टर की संरचनात्मक कमजोरियों और आर्थिक कारकों पर इसकी निर्भरता को उजागर करती है। SpiceJet, जो पहले से ही कर्ज और घाटे से जूझ रही है, बढ़ती लागत और कमजोर बैलेंस शीट के कारण और भी बड़े मुश्किलों का सामना कर रही है। इंपोर्टेड फ्यूल और भू-राजनीतिक अस्थिरता पर निर्भरता एक अप्रत्याशित लागत माहौल बनाती है। हालांकि सरकार ने घरेलू ATF की कीमतों में थोड़ी राहत दी है, पर वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है।

एनालिस्ट्स का मानना है कि एयरलाइंस जैसे IndiGo के लिए कमाई के अनुमानों (earnings estimates) को नीचे ले जाना पड़ सकता है, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं। लंबी अवधि के लिए, वैश्विक स्थिरता, एयरलाइंस की लागत नियंत्रण क्षमता और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने वाली सरकारी नीतियां महत्वपूर्ण होंगी। भारत का एविएशन मार्केट 2030 तक $26.08 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और FY26 में घरेलू यात्रियों की संख्या 165-170 मिलियन तक रहने की उम्मीद है। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.