इलेक्ट्रिक बस मार्केट में लीडरशिप का बदला चेहरा
फाइनेंशियल ईयर (FY) 25-26 में भारत का इलेक्ट्रिक बस सेक्टर जबरदस्त उठापठक का गवाह बना। कुल 4,341 यूनिट्स रजिस्टर हुईं, जो पिछले साल के मुकाबले 44% ज़्यादा हैं। इस दौरान, Switch Mobility 26.4% मार्केट शेयर के साथ 1,144 बसें डिलीवर करके टॉप पर रही। PMI Electro Mobility 25.6% शेयर के साथ 1,113 यूनिट्स के साथ दूसरे और JBM Auto 24.2% शेयर के साथ 1,052 यूनिट्स के साथ तीसरे स्थान पर रही।
सर्विस मॉडल से लीडर बनीं नई कंपनियां
यह नई रैंकिंग उन कंपनियों की वजह से बनी है जो सिर्फ बसें बेचने के बजाय चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंसिंग और लंबे समय तक मेंटेनेंस जैसी ज़रूरी सर्विसेज़ को अपने पैकेज में शामिल कर रही हैं। PMI Electro Mobility ने छोटे शहरों में 'डेपो-फर्स्ट' रणनीति अपनाई, जिसमें वे एंड-टू-एंड सॉल्यूशंस देते हैं। पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa) जैसे सरकारी प्रोग्राम में यह मॉडल काफी सफल रहा है। अब मार्केट ऐसी ऑपरेटर कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है जो इलेक्ट्रिक बस के पूरे लाइफसाइकिल को मैनेज कर सकें, न कि सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करें।
पुरानी कंपनियों पर 'जीरो एलोकेशन ट्रैप' का असर
इस बीच, पुरानी कंपनियों जैसे Tata Motors और Olectra Greentech की मुश्किलें बढ़ गई हैं। FY 25-26 में Tata Motors का मार्केट शेयर FY 24-25 के 35.1% से घटकर सिर्फ 4.1% रह गया। एक एनालिस्ट का कहना है कि यह Tata Motors की 'फाइनेंशियल प्रूडेंस और एसेट-लाइट बिज़नेस मॉडल पर फोकस' की ओर रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। ट्रेडिशनल मैन्युफैक्चरर-सेंट्रिक मॉडल इंटीग्रेटेड सर्विसेज़ की बढ़ती मांग को पूरा करने में पिछड़ रहे हैं। Volvo Eicher Commercial Vehicles (VECV) और अन्य पुरानी कंपनियों को भी ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भविष्य का अनुमान: ग्रोथ और वैल्यूएशन्स
बाजार का अनुमान है कि भारत में इलेक्ट्रिक बस मार्केट 2030 तक 18.2% से 21% की सालाना दर से बढ़कर $1.15 बिलियन से $2.92 बिलियन तक पहुँच सकता है। मौजूदा पब्लिकली ट्रेडेड कंपनियों में Olectra Greentech का P/E रेशियो लगभग 55.7 और JBM Auto का 56.0 है। Tata Motors का P/E 11.53 से 49.51 के बीच है, जबकि Switch Mobility की पैरेंट कंपनी Ashok Leyland का P/E करीब 26.92 है। इन कंपनियों की वैल्यूएशन्स में सर्विस-आधारित ईवी मॉडल्स के बढ़ते प्रीमियम को पूरी तरह से नहीं दिखाया गया है।
आउटलुक: इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस का दबदबा
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकारी सपोर्ट और बेहतर ऑपरेटिंग इकोनॉमिक्स के चलते यह तेज़ी जारी रहेगी। Chartered Speed Ltd. के Sanyam Gandhi बताते हैं कि अब इलेक्ट्रिक बसें सब्सिडी के बिना भी कॉस्ट-इफेक्टिव साबित हो रही हैं। आने वाले सालों में, वही कंपनियां बाज़ार पर राज करेंगी जो लगातार इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस दे सकें, टेंडर प्रोसेस को कुशलता से संभाल सकें और सर्विस डिलीवरी में इनोवेशन कर सकें।