तीन साल पहले, नुस्ली वाडिया की Go First ने वॉलंटरी बैंकरप्सी (Voluntary Bankruptcy) के लिए अर्जी दी थी, जिसके कारण 50 से ज़्यादा प्लेन फंसे रह गए थे। इस घटना ने ग्लोबल लीज़र्स के भरोसे को गहरा झटका दिया था, और उन्हें अपनी संपत्ति वापस लेने में काफी कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता का सामना करना पड़ा था।
लीज़र्स का भरोसा कैसे लौटा?
अब, एविएशन वर्किंग ग्रुप (AWG) ने भारत की कंट्री रिस्क रेटिंग (Country Risk Rating) को हाल के वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। यह इस बात का बड़ा संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय एयरक्राफ्ट ओनर्स और फाइनेंसर्स अब भारत में प्लेन लीज़ करने को काफी कम जोखिम वाला मानते हैं। यह सुधार लीगल फ्रेमवर्क और ऑपरेशनल प्रोसीजर में बेहतरी को दर्शाता है, जो लीज़र्स के हितों की बेहतर सुरक्षा करते हैं।
एविएशन में निवेश और फ्लीट विस्तार को मिलेगा बढ़ावा
इस बेहतर रेटिंग से भारतीय एविएशन सेक्टर में विदेशी निवेश (Foreign Investment) को और अधिक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयरलाइन्स के लिए एयरक्राफ्ट लीज़ पर लेना अब आसान हो सकता है, जिससे उन्हें शायद बेहतर शर्तें मिलें और अपनी फ्लीट का विस्तार करने के अवसर मिलें। यह डेवलपमेंट भारत के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और आधुनिकीकरण के लिए बेहद अहम है, जो पैसेंजर और कार्गो दोनों सेवाओं का समर्थन करेगा।
