फ्यूल का बोझ बढ़ा, इंटरनेशनल रूटों पर मंडराए बादल
भारतीय एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें अब सबसे बड़ी सिरदर्द बन गई हैं। ये लागत कुल परिचालन खर्च का 55-60% हो गई है, जबकि पहले यह 30-40% थी। ऊंची कीमतों का सबसे ज्यादा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ रहा है, जहाँ ATF की कीमतें अप्रैल 2026 में करीब ₹73 प्रति लीटर तक बढ़ीं। इस वजह से लंबी दूरी के कई रूट घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं। प्रमुख एयरलाइन Air India ने लाभप्रदता की चिंता के चलते यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे रूटों पर जुलाई तक अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कम कर दी हैं।
दूसरी ओर, घरेलू उड़ानों पर कीमतों में कुछ हद तक नरमी देखी जा रही है। अप्रैल में 25% की बढ़ोतरी की सीमा तय होने के बाद मई 2026 में घरेलू ATF की कीमतें स्थिर रहीं। इस अंतर ने IndiGo और SpiceJet जैसी एयरलाइंस को घरेलू उड़ानों पर थोड़ी राहत दी है, लेकिन यह मुनाफे के अंतर को और बढ़ा रहा है। Federation of Indian Airlines (FIA) का कहना है कि यह मूल्य अंतर परिचालन को और जटिल बना रहा है।
लागतें बढ़ाना मुश्किल
एयरलाइंस बढ़ती लागतों को यात्रियों पर डालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उन्हें बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। IndiGo, जो फ्यूल की कीमतों को हेज (hedge) नहीं करती, सीधे बाजार के उतार-चढ़ाव की चपेट में है। कंपनी ने फ्यूल सरचार्ज जोड़ा है, लेकिन नियमों के तहत घरेलू ईंधन मूल्य वृद्धि का केवल 25% ही यात्रियों से वसूला जा सकता है। ATF पर ₹50 प्रति लीटर का नया एक्साइज ड्यूटी (excise duty) भी एयरलाइंस के मुनाफे को कम कर रहा है। रेटिंग एजेंसी Moody's का मानना है कि IndiGo की छोटी बुकिंग विंडो (30-45 दिन) समय के साथ उच्च किराए के माध्यम से लागत वसूलने में मदद कर सकती है, लेकिन वर्तमान में मुनाफा बहुत कम है।
Air India ने किराए बढ़ाए हैं और फ्यूल सरचार्ज भी लगाया है, लेकिन ये नुकसान की भरपाई पूरी तरह नहीं कर पा रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि Air India अपनी क्षमता भी कम कर रही है और अपने बेड़े का अधिक उपयोग कर रही है, जिससे IndiGo के लीज पर लिए गए बेड़े की तुलना में अधिक लचीलापन मिल रहा है। FIA ने सरकार से घरेलू ATF पर 11% एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटाने और लागत को स्थिर करने के लिए मूल्य निर्धारण के तरीकों पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है।
गहरे संकट: घाटा, कमजोर मांग और रुपये की मार
मौजूदा फ्यूल संकट के अलावा, कुछ गहरी संरचनात्मक कमजोरियां भी सेक्टर को प्रभावित कर रही हैं। Air India, निजीकरण के बाद भी, लंबे समय से घाटे से जूझ रही है और FY2026 के लिए ₹22,000 करोड़ से अधिक के नुकसान की उम्मीद है। SpiceJet की वित्तीय स्थिति और भी खराब है, जहाँ लगातार घाटा और नेगेटिव P/E रेशियो (P/E ratio) देखा जा रहा है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने भारतीय विमानन उद्योग के लिए अपना आउटलुक (outlook) घटाकर नेगेटिव कर दिया है, जिसका मुख्य कारण फ्यूल की कीमतें, वैश्विक घटनाएं और कमजोर रुपया हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार उच्च किराए से मांग कम हो सकती है, खासकर छुट्टियों पर यात्रा करने वालों और बजट यात्रियों के बीच। इस सेक्टर में FY2026 में ₹17,000–18,000 करोड़ का नेट लॉस (net loss) होने का अनुमान है, और FY2027 के शुरुआती अनुमानों में भी कटौती की जा सकती है। पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का बंद होना और मध्य पूर्व में तनाव के कारण उड़ानों का लंबा होना, ईंधन की खपत और क्रू खर्च को बढ़ा रहा है। कमजोर पड़ता रुपया भी दबाव बढ़ा रहा है, क्योंकि कई एयरलाइन लागतें, जैसे लीज (lease) और रखरखाव, डॉलर में चुकानी पड़ती हैं।
हरित ईंधन का भविष्य बनाम वर्तमान संकट
इन तात्कालिक चुनौतियों से जूझते हुए, सरकार ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) और इसके मिश्रणों को ATF की परिभाषा में शामिल कर हरित भविष्य की ओर कदम बढ़ाया है। भारत ने वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) प्रयासों के अनुरूप, 2027 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर SAF के मिश्रण का लक्ष्य रखा है। हालांकि, ये दीर्घकालिक योजनाएं वर्तमान में उच्च परिचालन लागतों से जूझ रही एयरलाइंस को तत्काल कोई मदद नहीं दे रही हैं। घरेलू SAF मिश्रण की कोई आवश्यकता न होने के कारण, मुख्य ध्यान वर्तमान जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) की लागतों के प्रबंधन पर है। आयातित कच्चे तेल पर उद्योग की निर्भरता ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतों $109-$126 प्रति बैरल के आसपास रहने के कारण वैश्विक मूल्य झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। जैसे-जैसे नीतिगत बदलाव होते हैं, भारतीय विमानन का निकट भविष्य अस्थिर ऊर्जा बाजारों और एयरलाइंस द्वारा उन्हें प्रबंधित करने के तरीके से गहराई से जुड़ा रहेगा।
