Indian Airlines को बड़ा झटका, विदेशी एयरलाइंस की चांदी! जानिए कैसे

TRANSPORTATION
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Airlines को बड़ा झटका, विदेशी एयरलाइंस की चांदी! जानिए कैसे
Overview

भारत की एयरलाइन्स के लिए बीता पहला क्वार्टर (Q1) मुश्किलों भरा रहा। अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में **10%** की गिरावट आई, वहीं विदेशी एयरलाइन्स ने **6%** की बढ़त दर्ज की। मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर सबसे ज़्यादा गल्फ एयरलाइन्स पर हुआ, जिसका सीधा फायदा Lufthansa और British Airways जैसी एयरलाइन्स को मिला।

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अंतर्राष्ट्रीय सफर पर गिरी यात्रियों की संख्या

इस साल की पहली तिमाही में भारत आने-जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में मामूली 1.2% की गिरावट दर्ज की गई। जहाँ पिछले साल इसी अवधि में 1.93 करोड़ यात्री थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा 1.91 करोड़ रहा। लेकिन, इस गिरावट का असर सभी एयरलाइन्स पर एक जैसा नहीं रहा।

भारतीय एयरलाइन्स की मुश्किल बढ़ी

IndiGo और Air India जैसी भारतीय एयरलाइन्स के लिए यह क्वार्टर काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उनके यात्रियों की संख्या में लगभग 10% की भारी कमी आई। जहाँ पिछले साल की पहली तिमाही में उन्होंने 89.6 लाख यात्रियों को सेवा दी थी, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 80.9 लाख रह गई।

विदेशी एयरलाइन्स का दबदबा

इसके विपरीत, विदेशी एयरलाइन्स ने यात्रियों की संख्या में शानदार 6% की वृद्धि दर्ज की। उन्होंने पिछले साल के 1.03 करोड़ की तुलना में इस तिमाही में 1.1 करोड़ यात्रियों को संभाला। मार्च महीने में मध्य-पूर्व में छिड़े संघर्ष के कारण Emirates और Qatar Airways जैसी बड़ी गल्फ एयरलाइन्स को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका सीधा फायदा Lufthansa, British Airways और SWISS जैसी एयरलाइन्स को मिला, जिन्होंने अपनी क्षमता बढ़ाई और बड़े विमानों का इस्तेमाल करके भारत के लिए उड़ानें बढ़ाईं, जिससे उनके यात्रियों की संख्या में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ।

लम्बे रूट और बढ़ते खर्चे भारतीय एयरलाइन्स पर भारी

भारतीय एयरलाइन्स, खासकर गल्फ एयरलाइन्स के कमज़ोर पड़ने का पूरा फायदा नहीं उठा पाईं। पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने के कारण उन्हें लम्बे पश्चिमी रूट अपनाने पड़े। तेल की बढ़ती कीमतें और रुपया की गिरती वैल्यू के बीच, लम्बे रूट के कारण अतिरिक्त उड़ानें चलाना महंगा साबित हुआ। इन लम्बे फ्लाइट पाथ के चलते फ्यूल की खपत बढ़ गई और बीच में ज़्यादा रिफ्यूलिंग स्टॉप्स की ज़रूरत पड़ी। Air India, जो इकलौती डोमेस्टिक एयरलाइन है जो वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट चलाती है, लगातार घाटे के चलते अपनी उड़ानें कम कर चुकी है। IndiGo, जो वेट-लीज्ड (wet-leased) वाइड-बॉडी प्लेन पर निर्भर है, उसे भी पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

Q1 में मार्केट शेयर में बदलाव

जनवरी से मार्च के बीच Air India और Air India Express ने मिलकर 45.5 लाख यात्रियों को सेवा दी, जबकि IndiGo के यात्रियों की संख्या 39.3 लाख रही। हालाँकि, सबसे हालिया क्वार्टर में, IndiGo (38.2 लाख) ने Air India Group (37.7 लाख) को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया। इस संघर्ष का हवाई यात्रा के पैटर्न पर जो पूरा असर पड़ेगा, वो अप्रैल-जून क्वार्टर के आंकड़ों से ज़्यादा स्पष्ट होगा।

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