पैसेंजर ट्रैफिक में धीमी ग्रोथ, लेकिन लागत बेकाबू
वित्तीय वर्ष 2026 (FY2026) के अंत तक भारत के डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक में मामूली 1.4% की साल-दर-साल वृद्धि देखी गई, जो कुल 16.77 करोड़ यात्रियों तक पहुंची। मार्च 2026 में, ट्रैफिक में 1.0% की वृद्धि हुई, जो पिछले महीने की तुलना में 4.4% अधिक था। पोस्ट-पैंडेमिक रिकवरी के बाद यह ग्रोथ थोड़ी धीमी है। इसी के चलते, एयरलाइन्स ने मार्च में अपनी कैपेसिटी डिप्लॉयमेंट में 3.0% की कटौती की। हालांकि, पैसेंजर लोड फैक्टर (PLF) 89.5% के उच्च स्तर पर बना रहा (पिछले साल 86.0% था), जो विमानों के कुशल उपयोग को दर्शाता है।
फ्यूल और रुपये के झटके से Profit पर भारी दबाव
ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस में तेज बढ़ोतरी ने एयरलाइन्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 1 अप्रैल, 2026 तक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें पिछली तिमाही की तुलना में 9.2% और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18.2% बढ़ गईं। वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण मार्च में क्रूड ऑयल की कीमतें 45.5% उछलीं। इसके अलावा, कमजोर होता भारतीय रुपया एयरलाइन्स की प्रॉफिटेबिलिटी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
इंडस्ट्री की कमजोरियां: फ्यूल, करेंसी और मार्केट शेयर
भारतीय एविएशन सेक्टर हाई फिक्स्ड कॉस्ट्स के साथ काम करता है और इकोनॉमिक शिफ्ट्स के प्रति संवेदनशील है। मार्केट का करीब 50% हिस्सा रखने वाली IndiGo जैसी बड़ी एयरलाइन भी लागत दबाव का सामना कर रही है। UBS ने फ्यूल कॉस्ट और करेंसी डेप्रिसिएशन की चिंताओं के चलते IndiGo के स्टॉक को डाउनग्रेड भी किया है। वहीं, छोटी एयरलाइन SpiceJet गहरे नुकसान में है और क्रेडिटर डिस्प्यूट्स से जूझ रही है। एयरलाइन के कुल खर्चों का 30-40% सीधा फ्यूल से जुड़ा होता है, और 35-50% खर्च (जैसे एयरक्राफ्ट लीज, मेंटेनेंस) यूएस डॉलर में होता है। फ्यूल कॉस्ट में 1% की बढ़ोतरी प्री-टैक्स प्रॉफिट को 3% तक घटा सकती है, जबकि रुपये में 1% की गिरावट 5-6% तक का नुकसान पहुंचा सकती है।
ICRA ने Outlook को Negative किया, ₹17,000-18,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान
रेटिंग एजेंसी ICRA ने भारतीय एविएशन इंडस्ट्री का आउटलुक 'स्टेबल' से बदलकर 'नेगेटिव' कर दिया है। इसका मुख्य कारण जियोपॉलिटिकल घटनाएँ, ATF की बढ़ती कीमतें और भारतीय रुपये का गिरना है। ICRA का अनुमान है कि FY2026 में इंडस्ट्री को ₹17,000-18,000 करोड़ का नेट लॉस हो सकता है, जो FY2025 में हुए ₹55,000 करोड़ के नुकसान से भी अधिक है। क्षमता की कमी (जैसे फ्लीट ग्राउंडिंग और डिलीवरी में देरी) के कारण PLF भले ही ऊंचे बने हुए हैं, लेकिन यह बढ़ते यूनिट कॉस्ट को पूरा करने के लिए काफी नहीं है।
रिकवरी की उम्मीदें अभी अनिश्चित
ICRA का अनुमान है कि FY2027 में नेट लॉस घटकर ₹11,000-12,000 करोड़ हो सकता है, बशर्ते ट्रैफिक ग्रोथ बनी रहे और ऑपरेशनल नॉर्मलसी लौटे। हालांकि, जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन और एडवर्स करेंसी मूवमेंट इन अनुमानों के लिए डाउनसाइड रिस्क पैदा करते हैं। सरकार द्वारा ATF कीमतों में 25% की बढ़ोतरी को कैप करना और लैंडिंग/पार्किंग चार्जेज में तीन महीने की छूट कुछ राहत जरूर देती है, लेकिन ये ग्लोबल कॉस्ट प्रेशर के लिए केवल आंशिक समाधान हैं। सेक्टर का भविष्य कच्चे तेल की कीमतों के स्थिरीकरण, भारतीय रुपये के रुख और एयरलाइन्स द्वारा लागत प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
