भारतीय यात्री छोड़ रहे यूरोप का साथ: महंगा किराया और खतरे बने वजह, छुट्टियों का बदला 'ईस्ट' की ओर रुख!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारतीय यात्री छोड़ रहे यूरोप का साथ: महंगा किराया और खतरे बने वजह, छुट्टियों का बदला 'ईस्ट' की ओर रुख!
Overview

भारतीय यात्रियों का यूरोप की ओर रुझान कम हो रहा है। आसमान छूते हवाई किराए (जो **50-100%** तक बढ़ गए हैं) और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण, वे अब थाईलैंड और मलेशिया जैसे सस्ते, वीजा-फ्रेंडली एशियाई देशों के साथ-साथ घरेलू यात्राओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

यूरोप की यात्रा इस बार जेब पर भारी पड़ रही है। प्रमुख यूरोपीय शहरों के लिए नॉन-स्टॉप फ्लाइट्स का किराया अब ₹1.23 लाख से बढ़कर ₹1.6 लाख तक पहुँच गया है, जो सामान्य दरों से 100% तक ज़्यादा है। वहीं, इनडायरेक्ट फ्लाइट्स भी 50% तक महंगी हो गई हैं। ऐसे में, गल्फ क्षेत्र जैसे इलाकों में चल रहे संघर्षों और सुरक्षा चिंताओं ने यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय यात्रा योजनाओं पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। मध्य पूर्व, जो पहले एक लोकप्रिय स्टॉपओवर और हॉलिडे डेस्टिनेशन था, अब सुरक्षा कारणों से यात्रियों की लिस्ट में नीचे आ गया है।

इस महंगाई और सुरक्षा की चिंताओं के चलते, यात्री अब अधिक सुलभ और किफायती विकल्पों की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश टॉप चॉइस बनते जा रहे हैं। इन डेस्टिनेशन्स पर फ्लाइट्स छोटी होती हैं, वीजा प्रक्रिया आसान है और भारतीय रुपये के कमजोर होने के कारण ये काफी सस्ते भी पड़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, थाईलैंड ने 2025 में 24.8 लाख भारतीय पर्यटकों का स्वागत किया, जिसका श्रेय 60-दिन की वीजा-फ्री एंट्री पॉलिसी को जाता है। मलेशिया भी 31 दिसंबर, 2026 तक वीजा-फ्री एंट्री दे रहा है। छह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए एक शेंगेन-जैसे एकीकृत वीजा की भी चर्चा चल रही है, जो भारतीयों के लिए मल्टी-कंट्री ट्रिप को और आसान बना देगा। इसी बीच, घरेलू पर्यटन भी वापसी कर रहा है, जिसमें केरल, राजस्थान और उत्तर-पूर्व जैसे क्षेत्र काफी आकर्षण बटोर रहे हैं।

हालांकि, वैकल्पिक डेस्टिनेशन्स की मांग बढ़ने के बावजूद, ट्रैवल सेक्टर को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.90 के आसपास चल रहे भारतीय रुपये में गिरावट, अंतर्राष्ट्रीय यात्रा को और महंगा बना रही है। एविएशन इंडस्ट्री पिछले एक साल में जेट फ्यूल की लागत में लगभग 50% की बढ़ोतरी से भी जूझ रही है। इससे एयरलाइंस को फ्लाइट शेड्यूल कम करने और किराए बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिससे लोकप्रिय रूट्स पर उड़ानों की उपलब्धता सीमित हो जाएगी। एनालिसिस से पता चलता है कि यदि प्रतिबंध जारी रहे तो भारत और यूएई के बीच यात्रा की मांग उपलब्ध क्षमता से अधिक हो सकती है। घरेलू स्तर पर, कभी-कभी होने वाली ईंधन की कमी और स्थानीय परिवहन व होटलों में बाधाएं यात्रियों को झिझकने पर मजबूर कर सकती हैं, जिससे कुछ भारतीय क्षेत्रों में ग्रोथ धीमी हो सकती है।

भविष्य को देखें तो, भारत के आउटबाउंड टूरिज्म मार्केट में लगातार ग्रोथ की उम्मीद है, जो 2036 तक 68.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इस बढ़ते बाजार को आकर्षित करने के लिए कनेक्टिविटी और मार्केटिंग प्रयासों में सुधार कर रहे हैं, क्योंकि वे भारत को अपने पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख चालक के रूप में देखते हैं। एक्सपीरियंसियल ट्रैवल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और छोटे शहरों में बढ़ती आय जैसे फैक्टर इस मांग को और बढ़ाएंगे। बढ़ती एयरलाइन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करने की चाह रखने वाले अधिक भारतीयों के कारण इस बाजार का विस्तार जारी रहने की उम्मीद है।

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