सफर का बदला इकोनॉमिक्स
पश्चिमी देशों के लॉन्ग-हॉल (Long-Haul) बाजारों से भारतीयों का यह पलायन सिर्फ संस्कृति की पसंद नहीं है, बल्कि यह एविएशन (Aviation) सेक्टर में फैली मूल्य निर्धारण (Pricing Model) की समस्या का नतीजा है। यूरोप की गर्मियों की छुट्टियां अब भारतीय मध्यम और ऊपरी वर्ग के लिए बहुत महंगी साबित हो रही हैं। इसी वजह से सफर की दूरी कम हो गई है। एयरलाइंस और टूर ऑपरेटर्स लॉन्ग-हॉल रूट्स पर मांग कम होने से रेवेन्यू में गिरावट देख रहे हैं। ऐसे में, वे साउथ ईस्ट एशिया और भारत के अंदरूनी खूबसूरत जगहों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, जहां वॉल्यूम ज्यादा और मार्जिन कम है।
ऑपरेशन्स का री-कैलिब्रेशन (Recalibration)
Thomas Cook (India) जैसी कंपनियां इस बदलाव के लिए अपने ऑफर्स को एडजस्ट कर रही हैं। साउथ ईस्ट एशिया (जैसे फिलीपींस, वियतनाम और थाईलैंड) के शॉर्ट-हॉल (Short-Haul) मार्केट में मांग बढ़ने से उन ऑपरेटर्स के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है जो यूरोप या अमेरिका में निवेश कर चुके हैं। दूसरी ओर, डोमेस्टिक सेक्टर (Domestic Sector) इस बदले हुए पैसे को सोख रहा है। भारत के दूसरे दर्जे के शहरों, जैसे जैसलमेर, में बुकिंग में तीन अंकों की ग्रोथ देखी जा रही है। यह दिखाता है कि लोग अब ऐसी जगहों पर जाना पसंद कर रहे हैं जहां मल्टी-लेग (Multi-leg) और हाई-कॉस्ट (High-Cost) इंटरनेशनल यात्रा की झंझट न हो। इससे डोमेस्टिक होटल चेन्स और रीजनल लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स को फायदा हो रहा है, जबकि इंटरनेशनल एयरलाइंस फ्लीट (Fleet) की उपलब्धता और फ्यूल की बढ़ती कीमतों से जूझ रही हैं।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां और सेक्टर रिस्क
हालांकि डोमेस्टिक ट्रैवल में उछाल एक सहारा है, लेकिन यह भारत के टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर (Tourism Infrastructure) की गहरी स्ट्रक्चरल समस्याओं को छुपाता है। उत्तरी हिल स्टेशन्स (Hill Stations) और गोवा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भीड़ बढ़ने से सर्विस की क्वालिटी गिरी है। इससे हॉस्पिटैलिटी प्रोवाइडर्स के लिए ब्रांड वैल्यू (Brand Value) का बड़ा रिस्क पैदा हो गया है। इसके अलावा, धार्मिक और सीजनल टूरिज्म पर निर्भरता रेवेन्यू साइकल (Revenue Cycles) में हाई वोलैटिलिटी (Volatility) लाती है। ग्लोबल टूरिज्म कंपनियों के विपरीत, जो साल भर कई क्षेत्रों में काम करके फायदा उठाती हैं, भारतीय ऑपरेटर्स जो डोमेस्टिक स्पाइक्स (Domestic Spikes) पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं, वे अचानक मौसम या इंफ्रास्ट्रक्चर फेल होने के प्रति संवेदनशील हैं। ट्रैवल सर्विसेज की वर्तमान मूल्य निर्धारण (Pricing Environment) भी खतरे के निशान के करीब है; फ्यूल या लेबर पर कोई भी अतिरिक्त महंगाई दबाव आम यात्री की खर्च करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करेगा, जो पहले से ही डोमेस्टिक महंगाई से जूझ रहा है।
भविष्य का आउटलुक
बाजार का अनुमान है कि इस फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के दौरान क्षेत्रीयकरण (Regionalization) की यह प्रवृत्ति जारी रहेगी, क्योंकि एयरलाइंस हाई ऑपरेशनल एक्सपेंसेस (Operational Expenses) से जूझ रही हैं। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स (Industry Analysts) का मानना है कि जब तक ग्लोबल एविएशन कैपेसिटी (Aviation Capacity) स्थिर नहीं हो जाती और लॉन्ग-हॉल टिकट की कीमतें आम आदमी की परचेजिंग पावर (Purchasing Power) के अनुरूप नहीं हो जातीं, तब तक साउथ ईस्ट एशिया और डोमेस्टिक हब की ओर यह स्ट्रक्चरल झुकाव ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर के लिए ग्रोथ का मुख्य इंजन बना रहेगा। जो ऑपरेटर्स इन छोटी, अधिक बार-बार होने वाली यात्राओं के लिए अपने ऑफर्स को ऑप्टिमाइज (Optimize) करने में विफल रहेंगे, उन्हें मार्जिन में लगातार कमी का सामना करना पड़ेगा।
