ग्रोथ की रफ्तार और बड़े आंकड़े
रेटिंग एजेंसी Crisil के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर में AUM में लगभग 30% का बड़ा उछाल देखने को मिलेगा, जिससे यह मार्च 2027 तक करीब ₹3.9 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। मार्च 2026 तक यह ₹3 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। इस ग्रोथ की मुख्य वजह National Highways Authority of India (NHAI) द्वारा टोल रोड एसेट्स का आक्रामक मॉनेटाइजेशन और रोड डेवलपर्स द्वारा Hybrid Annuity Model (HAM) के तहत बनी एसेट्स की बिकवाली है। NHAI की नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0, जिसका लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2030 तक हाईवे एसेट्स से ₹4.14 लाख करोड़ जुटाना है, इस ग्रोथ को एक बड़ा बूस्ट दे रही है। दरअसल, पिछले कुछ सालों (फाइनेंशियल ईयर 2021 से 2025) में रोड InvIT AUM ने 42% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है।
निवेशकों का भरोसा और बाजार का सपोर्ट
सेक्टर की मजबूती की एक वजह InvIT पोर्टफोलियो में बढ़ती डाइवर्सिफिकेशन भी है, जिससे अलग-अलग इलाकों और कंसेशन के प्रकारों में निवेश फैलाया जा रहा है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों की बढ़ती संख्या इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही है। उम्मीद है कि समझदारी से लेवरेज (कर्ज) का प्रबंधन सेक्टर में मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखने में मदद करेगा। ऐतिहासिक तौर पर, InvITs ने ट्रेडिशनल शेयर बाज़ार और डेट से बेहतर प्रदर्शन किया है, Nifty REIT-InvIT इंडेक्स ने जुलाई 2019 से मार्च 2026 के बीच 12% का एनुअलाइज्ड रिटर्न दिया है।
टोल रोड्स का दबदबा
वर्तमान रोड InvIT AUM का लगभग 85% टोल रोड्स से आता है। ये रोड्स बढ़ते ट्रैफिक वॉल्यूम के जरिए भारत की आर्थिक ग्रोथ से सीधे जुड़े हैं, और इन्फ्लेशन-लिंक्ड टोल एडजस्टमेंट से अनुमानित आय मिलती है। भविष्य में और टोल रोड्स के जुड़ने की उम्मीद है, जो कि निवेशकों द्वारा पूंजी को फिर से लगाने और NHAI की मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन से आएंगे। हालांकि, केवल टोल रोड्स पर इतना ज्यादा निर्भर होना एक बड़ी कंसंट्रेशन रिस्क पैदा करता है।
सहायक अर्थव्यवस्था और बड़ा InvIT सेक्टर
भारत का समग्र आर्थिक माहौल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए काफी सहायक है। GDP ग्रोथ 2026 और 2027 के लिए लगभग 6.5% रहने का अनुमान है, और महंगाई RBI के लक्ष्य के करीब आ रही है। 2026 में ग्लोबल ब्याज दरों में संभावित गिरावट से भारत में उधार लेने की लागत कम हो सकती है और एसेट वैल्यू बढ़ सकती है। सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर प्राथमिकता बना हुआ है। हालांकि रोड InvITs एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर InvIT सेक्टर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों में भी फैल रहा है। फिर भी, रोड्स और टेलीकॉम कुल InvIT AUM का लगभग 90% हिस्सा रखते हैं, जो पूरे सेक्टर में लगातार कंसंट्रेशन की समस्या को दर्शाता है।
रोड InvITs के लिए बढ़ते रिस्क
सकारात्मक Outlook के बावजूद, रोड InvITs के लिए कई बड़े रिस्क मौजूद हैं। प्रमुख चिंताओं में बढ़ता हुआ लेवरेज शामिल है, जिसमें डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू रेशियो करीब 45% से 100-150 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है। एक्विजिशन के लिए कर्ज का इस्तेमाल करना लंबी अवधि की वित्तीय सेहत पर सवाल खड़ा करता है। बाजार में बिक्री के लिए परिपक्व (mature) और हाई-क्वालिटी टोल रोड एसेट्स ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे भविष्य के सौदों पर असर पड़ सकता है। NHAI की मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन पर निर्भरता एग्जीक्यूशन रिस्क पैदा करती है, खासकर प्रोजेक्ट में देरी की पिछली रिपोर्टों को देखते हुए। रोड सेगमेंट के वैल्यूएशन पर भी भारी कर्ज और प्रतिस्पर्धी बोली के कारण दबाव है। InvIT शेयर की कीमतों पर ब्याज दरों में बदलाव का असर पड़ता है, और अगर दरें अप्रत्याशित रूप से बढ़ती हैं तो उनकी आकर्षण क्षमता कम हो सकती है। State Bank of India ने भी NHAI के ट्रस्ट्स में क्रेडिटर प्रोटेक्शन और रीपेमेंट सीनियरिटी को लेकर चिंता जताई है, जो संभावित स्ट्रक्चरल कमजोरियों की ओर इशारा करती है।
आउटलुक: ग्रोथ और रिस्क का संतुलन
कुल मिलाकर, रोड InvIT सेक्टर सरकारी नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग के चलते आगे भी बढ़ता रहेगा। नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 एसेट मॉनेटाइजेशन के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करती है। हालांकि, कंसंट्रेशन रिस्क को मैनेज करना, बढ़ते लेवरेज को कंट्रोल करना और डाइवर्सिफाइड एसेट्स हासिल करना लंबी अवधि की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा। विश्लेषकों का मानना है कि भारत में कुल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश मजबूत ग्रोथ के लिए तैयार है, लेकिन रोड InvITs का रास्ता आक्रामक विस्तार और सावधानीपूर्वक वित्तीय प्रबंधन व एसेट डाइवर्सिफिकेशन के बीच संतुलन बनाने पर निर्भर करेगा।
