Indian Railways अपने AC कोचों से चादरों की बढ़ती चोरी पर लगाम कसने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। पिछले चार सालों में करीब **1.27 करोड़** चादरें गायब हो चुकी हैं, जिससे बेडरोल कॉन्ट्रैक्टर्स को लगभग **₹104.51 करोड़** का भारी नुकसान हुआ है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) को सामान की तलाशी लेने और गिरफ्तारी जैसे अधिकार देने पर विचार कर रही है।
क्यों उठानी पड़ रही है सख्त कार्रवाई?
Indian Railways के लिए AC कोचों से चादरें, कंबल और तकिए जैसी चीजें चोरी होना एक बड़ी सिरदर्दी बन गई है। साल 2022 से 2026 के बीच, 54 रेलवे डिवीजनों से मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम्स गायब हुए हैं। इस चोरी की वजह से बेडरोल सप्लाई करने वाले प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स को करीब ₹104.51 करोड़ का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है।
समस्या की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ सालों में चोरी की घटनाओं में 56% की बढ़ोतरी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि रेलवे नेटवर्क के दस डिवीजनों में ही 67% चोरी की घटनाएं हो रही हैं। इस वजह से ट्रेन अटेंडेंट जैसे फ्रंटलाइन स्टाफ की सैलरी से भी इन गायब आइटम्स की कीमत काटी जा रही है, जिससे उन पर दबाव बढ़ रहा है।
RPF को मिलेगी नई पावर?
रेल मंत्रालय इस समस्या से निपटने के लिए अपनी सुधार योजनाओं के तहत रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) को और अधिक अधिकार देने पर विचार कर रहा है। सबसे अहम प्रस्तावों में से एक है RPF को यात्रियों के सामान की तलाशी लेने और चादरों की चोरी के मामलों में सीधे गिरफ्तारी करने की पावर देना। वर्तमान में, रेलवे प्रॉपर्टी (अवैध कब्जा) अधिनियम के तहत रेलवे की संपत्ति की चोरी एक गैर-जमानती अपराध है। RPF को सीधे कार्रवाई करने के अधिकार मिलने से चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
फिलहाल, कोच अटेंडेंट यात्रियों के उतरने से 30 मिनट पहले चादरें वापस लेते हैं और वितरण पर नजर रखते हैं। लेकिन यात्रियों की भारी संख्या और लंबी दूरी की यात्राओं के कारण इन मैनुअल तरीकों से चोरी रोकना मुश्किल हो रहा है। कॉन्ट्रैक्टर्स के मार्जिन को बचाने और उनकी सर्विस क्वालिटी बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम जरूरी माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
यह स्थिति रेलवे नेटवर्क के लॉजिस्टिक्स और सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स में परिचालन चुनौतियों को उजागर करती है। बड़े पैमाने पर चोरी न केवल कॉन्ट्रैक्टर्स को प्रभावित करती है, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सर्विस के स्टैंडर्ड को भी कम करती है। रेलवे बोर्ड ने इन नई प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए समय मांगा है। अब देखना यह होगा कि RPF को ये अधिकार कब मिलते हैं और क्या ये सख्त नियम कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए लागत कम करने में प्रभावी साबित होते हैं, बिना यात्रियों को परेशानी दिए। बेडरोल मैनेजमेंट के लिए कॉन्ट्रैक्ट स्ट्रक्चर में कोई भी बदलाव या नई पॉलिसी का लागू होना महत्वपूर्ण संकेत होंगे।
