Indian Railways: कंटेनर लाइसेंसिंग हुई आसान, ठेकेदारों के लिए कड़े नियम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Railways: कंटेनर लाइसेंसिंग हुई आसान, ठेकेदारों के लिए कड़े नियम

भारतीय रेलवे ने कंटेनर ऑपरेटर्स के लिए पूरे देश में एक समान लाइसेंस की शुरुआत की है, जिसकी फीस **₹25 करोड़** रखी गई है। इस कदम का मकसद माल ढुलाई (freight logistics) में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाना है। इसके साथ ही, मंत्रालय ने प्रोजेक्ट ठेकेदारों के लिए पात्रता नियमों को और सख्त कर दिया है, जिसमें **10%** परफॉरमेंस सिक्योरिटी की अनिवार्यता शामिल है।

रेलवे में बड़े सुधारों का ऐलान

भारतीय रेलवे ने अपनी माल ढुलाई (freight logistics) और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की है। इसका सबसे अहम हिस्सा कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर्स के लिए एक पूरे भारत में मान्य, एकीकृत (unified) लाइसेंस की शुरुआत है। पहले अलग-अलग राज्यों के लिए या टुकड़ों में लाइसेंस लेने पड़ते थे, लेकिन अब एक ही लाइसेंस से काम चलेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों का काम आसान होगा। इस नए लाइसेंस के लिए ₹25 करोड़ की रजिस्ट्रेशन फीस रखी गई है। खास बात यह है कि 20 साल के ऑपरेशन के बाद बार-बार रिन्यूअल फीस नहीं देनी होगी, जिससे प्राइवेट कंपनियों के लिए लंबे समय में नियम-कानून की मुश्किलें कम होंगी।

फ्लाई ऐश की ढुलाई होगी आसान

लाइसेंस सुधार के साथ-साथ, रेलवे ने खास कवर्ड कंटेनर्स भी पेश किए हैं, जिनसे फ्लाई ऐश (fly ash) की ढुलाई की जा सकेगी। फ्लाई ऐश, थर्मल पावर प्लांट्स का एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जिसे धूल और हैंडलिंग की दिक्कतों के चलते ट्रांसपोर्ट करना मुश्किल होता था। फिलहाल, भारत में हर साल पैदा होने वाले 340 मिलियन मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का केवल 4% ही रेल से ट्रांसपोर्ट हो पाता है। अब टॉप-लोडिंग कवर्ड कंटेनरों के इस्तेमाल से रेलवे इस वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा अपने नाम करना चाहता है। यह सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक क्लीनर ट्रांसपोर्ट का ऑप्शन देगा।

प्रोजेक्ट ठेकेदारों के लिए नए नियम

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने वाले ठेकेदारों के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब उन्हें 10% की परफॉरमेंस सिक्योरिटी एडवांस में देनी होगी। साथ ही, जिन ठेकेदारों पर 50% से ज्यादा की नेट वर्थ के बराबर लंबित मुकदमे चल रहे हैं, वे टेंडर्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। नई पॉलिसी के तहत, ठेकेदारों के लिए प्रोफेशनल इंडेम्निटी और ऑल-रिस्क इंश्योरेंस लेना भी अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के दौरान फाइनेंशियल और ऑपरेशनल जोखिमों को कम किया जा सके।

जमीन अधिग्रहण और प्रोजेक्ट टाइमलाइन

इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए 'रेल भूमि' (Rail Bhoomi) पोर्टल लॉन्च किया गया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से उम्मीद है कि प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन 40% तक कम हो जाएगी। ये सभी कदम इस साल होने वाले 52 अलग-अलग सुधारों की बड़ी योजना का हिस्सा हैं, जिनका मकसद रेलवे को और ज्यादा एफिशिएंट बनाना है।

निवेशकों के लिए, यह देखना अहम होगा कि प्राइवेट ऑपरेटर्स इन नए कंटेनर लाइसेंस को कितना अपनाते हैं और क्या ये नियम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में लगने वाले समय को कम कर पाते हैं। 'रेल भूमि' पोर्टल का लागू होना और प्रोजेक्ट्स में देरी का वास्तविक कम होना, इन सुधारों की सफलता को मापने के लिए जरूरी होगा।

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