Indian Railways ने अपनी 'घर से घर तक' पार्सल सर्विस का दायरा 8 प्रमुख शहरों तक बढ़ा दिया है। प्राइवेट पार्टनर के साथ मिलकर रेलवे अब रोड लॉजिस्टिक्स कंपनियों को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है, साथ ही राउंड-ट्रिप पर **25%** का भारी डिस्काउंट भी दे रहा है।
कैसे काम करेगा रेलवे का नया मॉडल?
रेलवे अब अपने 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के जरिए अर्बन कार्गो मार्केट पर कब्जा करना चाहती है। इसमें लंबी दूरी तक का ट्रांसपोर्टेशन रेलवे खुद संभालेगी, जबकि फर्स्ट-माइल और लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए प्राइवेट लॉजिस्टिक्स पार्टनर मदद करेंगे। यह कदम उन ग्राहकों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है जिन्हें स्टेशन तक सामान पहुंचाने में दिक्कत होती थी।
ग्राहकों के लिए क्या है खास?
फेस्टिव सीजन की भारी मांग को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने आक्रामक रुख अपनाया है। पार्सल एग्रीगेटर्स को राउंड-ट्रिप बुकिंग पर फ्रेट कॉस्ट में 25% तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है, ताकि व्यापारी आसानी से अपना स्टॉक रिन्यू कर सकें।
प्राइवेट खिलाड़ियों के लिए चुनौती
बाजार के जानकारों की नजर अब ब्लू डार्ट (Blue Dart), डेल्हीवरी (Delhivery) और टीसीआई एक्सप्रेस (TCI Express) जैसी कंपनियों पर है। इन कंपनियों की पकड़ उनकी बेहतरीन टेक्नोलॉजी और सर्विस क्वालिटी पर है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रेलवे का डिजिटल ऐप और नेटवर्क, प्राइवेट प्लेयर्स की टाइमिंग और सर्विस भरोसे को टक्कर दे पाएगा या नहीं। इन्वेस्टर्स के लिए यह सेक्टर अब और भी कॉम्पिटिटिव हो गया है, क्योंकि कार्गो वॉल्यूम अब रोड से शिफ्ट होकर रेल की पटरियों पर आने की कोशिश कर रहा है।
