सरप्लस की राह: दस साल की मेहनत रंग लाई
भारतीय रेलवे (Indian Railways) के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, रेलवे ने ₹2,660 करोड़ का नेट सरप्लस (Net Surplus) हासिल किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह सरप्लस सभी परिचालन खर्चों, जैसे स्टाफ, ऊर्जा और रखरखाव पर करीब ₹2.74 लाख करोड़ खर्च करने के बाद आया है। यह पिछली बार की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जब रेलवे घाटे में चल रहा था।
दक्षता के पहिये: लागत में बचत और बढ़ा फ्रेट
इस मुनाफे (Profit) का मुख्य श्रेय ऊर्जा लागत में भारी बचत और फ्रेट ट्रैफिक (Freight Traffic) में हुई वृद्धि को जाता है। रेलवे के व्यापक इलेक्ट्रिफिकेशन (Electrification) के चलते ऊर्जा लागत में ₹5,500 करोड़ की बचत हुई, वहीं फ्रेट वॉल्यूम में 400 मिलियन टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ऑपरेटिंग रेश्यो पर कसावट: 98% के पार
लेकिन, यह सरप्लस एक बहुत ही टाइट ऑपरेटिंग रेश्यो (Operating Ratio) के दायरे में आया है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए यह रेश्यो 98.22% रहा, जो पिछले साल के 98.43% से थोड़ा बेहतर है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो लगातार 98% से ऊपर रहा है, कई बार तो यह 100% को भी पार कर गया है। इसका मतलब है कि रेलवे अपनी कमाई का लगभग हर रुपया परिचालन में ही खर्च कर देता है, जिससे अप्रत्याशित खर्चों या निवेश के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है।
निवेश का जोर और कर्ज़ का बोझ
एक तरफ जहाँ परिचालन लागतें बढ़ी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण (Modernization) और विस्तार (Expansion) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में भारी निवेश कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में जहाँ यह ₹1.1 लाख करोड़ के करीब था, वहीं फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए यह बढ़कर ₹2.6 लाख करोड़ तक पहुँच गया है, और फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹2.81 लाख करोड़ होने का अनुमान है। इन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग काफी हद तक इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) जैसी संस्थाओं के जरिए मार्केट बॉरोइंग्स (Market Borrowings) पर निर्भर करती है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) अभी भी काफी ऊंचा है।
आगे की राह: विकास के साथ वित्तीय प्रबंधन की चुनौती
भविष्य में, रेलवे का लक्ष्य इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिफिकेशन और क्षमता विस्तार (Capacity Expansion) में भारी निवेश जारी रखना है। हालांकि, रेलवे पर एक बड़ा पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन (Public Service Obligation) भी है, जिसमें यात्री किराए पर सालाना करीब ₹60,000 करोड़ की सब्सिडी शामिल है, जो किराए को 45% तक कम कर देती है। इस भारी सब्सिडी, टाइट ऑपरेटिंग मार्जिन और कर्ज के बोझ को देखते हुए, रेलवे को अपनी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार लागत दक्षता (Cost Efficiency) और सावधानीपूर्वक फिस्कल मैनेजमेंट (Fiscal Management) की जरूरत होगी।