Indian Railways: सुरक्षा में बड़ा मुकाम, अब हादसों में मौतों का आंकड़ा सिंगल डिजिट पर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Railways: सुरक्षा में बड़ा मुकाम, अब हादसों में मौतों का आंकड़ा सिंगल डिजिट पर

भारतीय रेलवे ने सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब हादसों में होने वाली मौतों की संख्या गिरकर सिंगल डिजिट में आ गई है, जिसके पीछे मानव रहित क्रॉसिंग हटाने और आधुनिक कोच डिजाइन का बड़ा हाथ है।

सुरक्षा का नया अध्याय

भारतीय रेलवे ने पिछले एक साल में दुर्घटनाओं से जुड़ी मौतों को घटाकर सिंगल डिजिट तक सीमित कर लिया है। यह उन दशकों की तुलना में एक बड़ा बदलाव है जब हर साल सैकड़ों जानें चली जाती थीं। इस सुधार का श्रेय मानव रहित लेवल क्रॉसिंग को खत्म करने और Linke Hofmann Busch (LHB) कोचों व आधुनिक Vande Bharat ट्रेनों को अपनाने जैसे ठोस कदमों को जाता है।

Kavach सिस्टम की भूमिका

अब रेलवे का पूरा ध्यान हादसों को होने से पहले रोकने पर है। इसके लिए Kavach (स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) गेम-चेंजर साबित हो रहा है। यह सिस्टम ड्राइवर से चूक होने या टक्कर का खतरा होने पर ट्रेन को खुद-ब-खुद रोक देता है। हालांकि, इसकी चुनौती अभी भी बरकरार है क्योंकि लोकोमोटिव में तो तकनीक लग गई है, लेकिन ट्रैक के साथ लगने वाले सेंसर का काम अभी भी पूरा होना बाकी है। निवेशकों की नज़रें अब इसी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की रफ्तार पर टिकी हैं।

डेटा और टेक्नोलॉजी का तालमेल

रेलवे के पास इस वक्त स्टेशन लॉग और लोकोमोटिव कंप्यूटरों से मिलने वाला डेटा का विशाल भंडार है, लेकिन यह जानकारी अभी अलग-अलग हिस्सों (silos) में बंटी हुई है। अब जरूरत एक ऐसे Artificial Intelligence (AI) आधारित प्लेटफॉर्म की है जो असामान्य ब्रेकिंग पैटर्न या सिग्नल की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ सके। इस प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस मॉडल से खराबी आने से पहले ही उसे सुधारा जा सकेगा।

आगे की राह अब इस बात पर निर्भर करेगी कि रेलवे सिर्फ विस्तार परियोजनाओं पर ही नहीं, बल्कि नियमित मेंटेनेंस और एविडेंस-बेस्ड ऑपरेशंस पर कितना जोर देता है, ताकि सुरक्षा का यह स्तर स्थायी बना रहे।

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