पैसेंजर लोकोमोटिव की लगातार कमी के चलते Indian Railways को मजबूरन मालगाड़ी वाले इंजनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे हर महीने **80 से 100** ट्रेनें लेट हो रही हैं।
भारतीय रेलवे इन दिनों पैसेंजर ट्रेनों के लिए जरूरी इंजनों (Locomotives) की भारी कमी से जूझ रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि रेलवे को एक्सप्रेस रूट पर मालगाड़ी वाले इंजनों का उपयोग करना पड़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने करीब 80 से 100 बार ऐसी अदला-बदली करनी पड़ती है, जिससे ट्रेनों की रफ्तार और समय-सारणी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
तकनीकी पेंच और रफ्तार का संकट
समस्या इन इंजनों की डिजाइन में है। पैसेंजर रूट के लिए बने WAP सीरीज के इंजन तेज रफ्तार के लिए होते हैं, जबकि मालगाड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले WAG सीरीज के इंजन भारी वजन खींचने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इन इंजनों की वजह से ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा तक सीमित हो जाती है, जबकि कई एक्सप्रेस ट्रेनों को 130 किमी प्रति घंटा की गति की जरूरत होती है। इससे पूरा रेल नेटवर्क प्रभावित होता है और देरियां बढ़ती जाती हैं।
भविष्य की योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर
मौजूदा समय में रेलवे के पास 13,700 इलेक्ट्रिक इंजन हैं, जिनमें से मात्र 3,400 ही पैसेंजर सर्विस के लिए हैं। नेटवर्क के तेजी से विस्तार के बावजूद, पैसेंजर इंजनों की संख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ी है। सरकार ने इस समस्या को सुलझाने के लिए अगले 2 फाइनेंशियल ईयर यानी 2026-2028 के दौरान 679 नए पैसेंजर लोकोमोटिव बनाने की मंजूरी दी है।
रेल-लिंक्ड शेयरों पर असर
Indian Railways खुद एक सरकारी संस्था है, लेकिन यह समस्या शेयर बाजार में लिस्टेड रेल सेक्टर की कंपनियों जैसे Indian Railway Finance Corporation (IRFC) और IRCTC के लिए काफी मायने रखती है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि 679 नए इंजनों का निर्माण कितनी तेजी से पूरा होता है। मैन्युफैक्चरिंग में देरी से सेक्टर की एफिशिएंसी पर सवाल उठ सकते हैं, वहीं इस प्रोजेक्ट का समय पर पूरा होना रेल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित हो सकता है।
