Indian Railways के AC कोचों से चोरी हो रही चादरें, तौलिये और कंबल ठेकेदारों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। पिछले 4 सालों में यह नुकसान **₹100 करोड़** से भी ज्यादा हो चुका है, जिसका असर स्टाफ की सैलरी पर भी पड़ रहा है।
रेल यात्रियों की लापरवाही से रेलवे को बड़ा झटका
Indian Railways के AC कोचों से चादरें, तौलिये और कंबल जैसी चीज़ों की चोरी एक बड़ी समस्या बन गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच करीब 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम्स ट्रेनों से गायब हुए हैं। यह चोरी 54 रेलवे डिवीजनों में फैली हुई है और इसकी वजह से सर्विस मैनेज करने वाले ठेकेदारों को अब तक ₹104.51 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हो चुका है।
स्टाफ की सैलरी पर भी असर
इस चोरी का सीधा असर रेलवे स्टाफ पर भी पड़ रहा है। कई मामलों में, अटेंडेंट्स को चोरी हुए सामान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है और उनकी सैलरी से पैसे काटे जाते हैं। अगर किसी अटेंडेंट की महीने की कमाई ₹14,000 है, तो कुछ हजार रुपये कटने का मतलब है कि उसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा चला जाता है। यह स्थिति रेलवे के लाखों कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा रही है, जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक में हर दिन हजारों आइटम्स मैनेज करने होते हैं।
ठेकेदारों के लिए ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दबाव
जो प्राइवेट ठेकेदार रेलवे के लिए लॉन्ड्री और लिनेन सप्लाई का काम करते हैं, उनके लिए यह नुकसान सिर्फ एक परेशानी नहीं है, बल्कि उनके बिजनेस की वायबिलिटी पर भी असर डालता है। हर दिन 8 लाख के करीब AC कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए सामान मैनेज करने और चोरी हुए सामान को लगातार बदलने की व्यवस्था में भारी लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। जब चोरी हुए आइटम्स की संख्या लगातार ज़्यादा होती है, तो नए सामान खरीदने और मेंटेनेंस का खर्च सर्विस प्रोवाइडर्स के प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकता है।
हालांकि चोरी रोकने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं, जैसे कि तौलिये सिर्फ मांगने पर देना, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या के चलते पूरी तरह से कंट्रोल करना मुश्किल है। इस वित्तीय बोझ को और बढ़ाता है कि यह नुकसान लगातार हो रहा है, जिसके कारण सर्विस स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए नए स्टॉक में लगातार निवेश करना पड़ता है।
भविष्य की क्या हैं उम्मीदें?
जो निवेशक और स्टेकहोल्डर्स Indian Railways के लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर पर नज़र रख रहे हैं, उनके लिए यह देखना ज़रूरी होगा कि अथॉरिटी और ठेकेदार अपनी इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम को कैसे बेहतर बनाते हैं। भविष्य में, एसेट ट्रैकिंग के लिए नई टेक्नोलॉजी, वेंडर्स को ज़्यादा जुर्माने से बचाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों में बदलाव, या कम लागत वाले मटेरियल का इस्तेमाल जैसी चीज़ों पर नज़र रखी जा सकती है। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हो रहा है और यात्रियों की मांग बढ़ रही है, इन ऑपरेशनल कॉस्ट को सुचारू बनाना इस इकोसिस्टम से जुड़े ठेकेदारों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बना रहेगा।
