Indian Ports: कंटेनर ट्रैफिक में 7-9% की रफ्तार, पर कोयले की डिमांड घटेगी!

TRANSPORTATION
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Ports: कंटेनर ट्रैफिक में 7-9% की रफ्तार, पर कोयले की डिमांड घटेगी!

आने वाले तीन सालों यानी FY28 तक भारतीय पोर्ट्स पर कंटेनर ट्रैफिक (Container Traffic) में सालाना **7-9%** की शानदार ग्रोथ का अनुमान है। यह तेजी घरेलू खपत बढ़ने और लॉजिस्टिक्स में कंटेनर के बढ़ते इस्तेमाल से आएगी। हालांकि, इस दौरान कोयले के ट्रैफिक में **2-4%** की गिरावट देखी जा सकती है, क्योंकि देश रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की ओर बढ़ रहा है।

बदलता कार्गो सिनेरियो: क्या कहते हैं आंकड़े?

भारतीय समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। FY26 से FY28 के बीच, पोर्ट्स पर कंटेनर ट्रैफिक में 7-9% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) रहने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह है बढ़ती घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कंटेनर-आधारित लॉजिस्टिक्स (Containerized Logistics) का बढ़ता चलन।

कोयले पर ग्रहण, पर अन्य सेक्टर्स में तेजी

जहां एक तरफ कंटेनर ट्रैफिक रफ्तार पकड़ेगा, वहीं कोयले (Coal) का ट्रैफिक 2-4% सालाना की दर से घटने का अनुमान है। इसका कारण है देश का रिन्यूएबल एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ना और घरेलू कोयला उत्पादन में इजाफा। हालांकि, कोयले की कोस्टल मूवमेंट (Coastal Movement) पोर्ट्स के लिए एक स्थिर जरिया बनी रहेगी।

एनर्जी सेक्टर की बात करें तो पेट्रोलियम, ऑयल और लुब्रिकेंट्स (POL) में 2-4% की मामूली ग्रोथ देखने को मिल सकती है। वहीं, आयरन ओर (Iron Ore) ट्रैफिक में 5-7% की रिकवरी का अनुमान है। यह तेजी घरेलू स्टील प्लांट्स में इसके बढ़ते इस्तेमाल और इंपोर्ट बढ़ने से जुड़ी है।

पिछला प्रदर्शन और भविष्य की चुनौतियां

FY26 में भारतीय मेजर पोर्ट्स पर कार्गो वॉल्यूम 7% बढ़कर 915 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया था। इसमें POL और क्रूड ऑयल की हिस्सेदारी 30% थी, जिसमें 16% की सालाना ग्रोथ देखी गई। वहीं, नॉन-मेजर पोर्ट्स पर 1.4% की मामूली ग्रोथ के साथ 753 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो रहा।

इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) और सरकारी पहलों जैसे सागरमाला (Sagarmala) और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 (Maritime Amrit Kaal Vision 2047) पर निर्भर करेगा। कनेक्टिविटी गैप्स को पाटना और पॉलिसी लागू करने में देरी जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। निवेशकों को पोर्ट ऑपरेटर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले असर पर पैनी नजर रखनी चाहिए, खासकर उन कंपनियों पर जो कोयले जैसे घटते सेगमेंट से जुड़ी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.