Air India Crash: नए खुलासे से Boeing की बढ़ीं मुश्किलें! पायलट यूनियन का दावा - 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' था जिम्मेदार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Air India Crash: नए खुलासे से Boeing की बढ़ीं मुश्किलें! पायलट यूनियन का दावा - 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' था जिम्मेदार
Overview

Air India के जून **2025** में हुए 787 Dreamliner क्रैश को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने दावा किया है कि यह दुर्घटना पायलट की गलती से नहीं, बल्कि 'लिफ्ट-ऑफ से पहले हुई इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी' के कारण हुई थी।

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नई थ्योरी: 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' था एयर इंडिया क्रैश की वजह?

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने जून 2025 में हुए Air India AI171 क्रैश के पीछे एक नई तकनीकी वजह बताई है। यूनियन का दावा है कि यह दुर्घटना पायलट की गलती से नहीं, बल्कि 'लिफ्ट-ऑफ से पहले हुई एक इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी' (pre-lift-off electrical disturbance) के कारण हुई। FIP के मुताबिक, इस गड़बड़ी से 'अनइंटेंडेड रिले ऑपरेशन' हुआ, जिसने शायद दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई एक साथ बंद कर दी। यह थ्योरी उन शुरुआती निष्कर्षों को चुनौती देती है जिनमें पायलट एरर को जिम्मेदार ठहराया गया था। FIP ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में Boeing के 'मोर-इलेक्ट्रिक' 787 डिज़ाइन में ऐसी जटिल इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खामियों की ओर इशारा किया है।

Boeing 787 का 'मोर-इलेक्ट्रिक' डिज़ाइन जांच के घेरे में

787 Dreamliner प्लेन पारंपरिक न्यूमेटिक और हाइड्रोलिक सिस्टम की जगह इलेक्ट्रिकल पावर पर ज्यादा निर्भर करता है। इस 'मोर-इलेक्ट्रिक' डिज़ाइन में छह जनरेटर और एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जो एफिशिएंसी तो बढ़ाता है, पर बिजली से जुड़ी नई समस्याएं भी खड़ी कर सकता है। FIP की थ्योरी बताती है कि बैटरी में शॉर्ट सर्किट या असामान्य वोल्टेज जैसी स्थिति रिले के काम करने के तरीके को बदल सकती है। इसके चलते फ्यूल शटऑफ वाल्व को कंट्रोल करने वाले रिले शायद एक साथ दोनों इंजनों के लिए ऑपरेट हो गए हों, खासकर जब Ram Air Turbine एक्टिवेट हो। यह Boeing के पावरफुल इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जटिलताओं को उजागर करता है।

सुरक्षा चिंताओं से Boeing की मार्केट पोजिशन पर असर

नई सुरक्षा चिंताओं के चलते Boeing के शेयर पर दबाव बढ़ा है। 5 मई, 2026 को कंपनी के शेयर $221.30 से $227.38 के दायरे में ट्रेड कर रहे थे, और कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $175-180 बिलियन था। Boeing का P/E रेशियो 95.9 से 107 के पार बना हुआ है, जो भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है। हालांकि, 737 MAX के ग्राउंडिंग जैसे हादसों से Boeing को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जब उसके शेयर 18% तक गिर गए थे। इस तरह की घटनाएं निवेशक के भरोसे को हिला सकती हैं और भविष्य के विमान ऑर्डर्स को भी प्रभावित कर सकती हैं।

Boeing के शेयर और ऑर्डर्स पर मंडरा रहे खतरे

FIP की थ्योरी क्रैश की अंतिम रिपोर्ट में देरी कर सकती है और अनिश्चितता को बढ़ा सकती है। इससे नियामकों (regulators) की Boeing के डिज़ाइन फिलॉसफी पर पैनी नजरें हो सकती हैं। ऐसे में, ग्राहक Airbus के मुकाबले Boeing के नए ऑर्डर्स को टाल सकते हैं या रद्द कर सकते हैं। 2025 में Airbus ने नेट ऑर्डर्स के मामले में Boeing को पछाड़ दिया था। Boeing के 777X की डिलीवरी में देरी के बीच, Airbus A350 को भी Boeing 787 का एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।

एनालिस्ट्स की राय: सतर्क उम्मीदवाद और बढ़ते जोखिम

अधिकांश एनालिस्ट Boeing के शेयर को 'Buy' या 'Strong Buy' की रेटिंग दे रहे हैं, और उनका लक्ष्य 20-24% तक की तेजी का अनुमान है। लेकिन, लगातार सामने आ रही सुरक्षा जांचें और FIP की नई तकनीकी थ्योरी एक बड़ी चिंता का विषय हैं। 'मोर-इलेक्ट्रिक' विमानों में डिज़ाइन की खामियों की कोई भी संभावना गंभीर समीक्षा के दायरे में आएगी। Weiss Ratings जैसी कुछ फर्मों ने Boeing को 'Sell' रेटिंग भी दी है, जो कंपनी के सामने मौजूद जोखिमों को दर्शाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.