Aviation Sector: एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अब खरीद सकेंगे एयरलाइंस में हिस्सेदारी? सरकार कर रही विचार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Aviation Sector: एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अब खरीद सकेंगे एयरलाइंस में हिस्सेदारी? सरकार कर रही विचार

भारत सरकार एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को एयरलाइंस में हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देने पर विचार कर रही है, हालांकि यह कदम विवादों में भी घिर सकता है।

भारत सरकार एक बड़े नीतिगत बदलाव की तैयारी में है, जिसके तहत एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को एयरलाइंस कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी रखने की इजाजत दी जा सकती है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने पुष्टि की है कि मंत्रालय इस मॉडल की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य 2047 तक देश में 350 से अधिक चालू एयरपोर्ट्स के लक्ष्य को हासिल करना और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी निवेश जुटाना है।

क्यों है यह एक बड़ा बदलाव?

भारत में अब तक एयरपोर्ट ऑपरेशंस और एयरलाइन सेवाओं को हमेशा अलग रखा गया है ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे। एयरपोर्ट ऑपरेटर रनवे एक्सेस, लैंडिंग स्लॉट्स और टर्मिनल जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को नियंत्रित करते हैं, जो एक तरह की नेचुरल मोनोपली होती है। वहीं, एयरलाइंस का बिजनेस पूरी तरह से कॉम्पिटिटिव होता है।

'Conflict of Interest' का डर

इस प्रस्ताव के सामने सबसे बड़ी चुनौती हितों का टकराव (Conflict of Interest) है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों की मालिक होगी, तो वह अपनी एयरलाइन को प्राथमिकता दे सकती है। इससे लैंडिंग स्लॉट्स और गेट एक्सेस जैसे मामलों में भेदभाव हो सकता है, जो वर्तमान के OMDA (ऑपरेशन, मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट एग्रीमेंट) के नियमों के खिलाफ है।

निगरानी की क्या तैयारी?

अगर सरकार यह फैसला लेती है, तो उसे कड़े नियम बनाने होंगे ताकि सभी एयरलाइंस को समान व्यवहार मिले। इस प्रक्रिया में AERA (एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी) और DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) की भूमिका बेहद अहम होगी। फिलहाल यह प्रस्ताव सिर्फ कंसल्टेशन के चरण में है और सरकार इसके नफा-नुकसान को तौल रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.