Indian Exporters की बढ़ी मुश्किलें: शिपिंग कॉस्ट में 4 गुना उछाल, सरकार से राहत की उम्मीद

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Exporters की बढ़ी मुश्किलें: शिपिंग कॉस्ट में 4 गुना उछाल, सरकार से राहत की उम्मीद

भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters) इस वक्त एक बड़ी लॉजिस्टिक्स (Logistics) क्राइसिस से जूझ रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के लिए शिपिंग कंटेनर की लागत **3 से 4 गुना** बढ़ गई है। भू-राजनीतिक तनावों के कारण जहाजों की कमी हो गई है और रूट बदलने पड़े हैं, जिससे त्योहारी सीजन के लिए समय पर माल भेजने का जोखिम बढ़ गया है।

शिपिंग कॉस्ट में बेतहाशा वृद्धि

भारतीय निर्यातक इस समय एक गंभीर लॉजिस्टिक्स संकट का सामना कर रहे हैं। कंटेनर जहाजों की कमी के चलते शिपिंग रेट रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और यूरोप के लिए ट्रांसपोर्ट की लागत 3 से 4 गुना तक बढ़ गई है, जो कुछ महीने पहले लगभग $3,000 प्रति कंटेनर थी, वहीं अब यह $9,000 के करीब पहुंच गई है। इस भारी बढ़ोतरी से बागवानी (Horticulture) और अन्य निर्यात क्षेत्रों की कंपनियों पर तत्काल वित्तीय दबाव आ गया है।

APEDA से मदद की गुहार

हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (Horticulture Produce Exporters Association) शुक्रवार को एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) और शिपिंग प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाली है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा बढ़ती लागत और लगातार हो रही देरी को प्रबंधित करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग करना है। शिपिंग सेक्टर मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनावों, खासकर लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास, से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इन संघर्षों के कारण कई शिपिंग लाइनों को केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) के चक्कर लगाकर जहाजों को रूट करना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय और ईंधन की खपत काफी बढ़ जाती है।

त्योहारी सीजन पर खतरा

यह व्यवधान बागवानी फर्मों के लिए विशेष रूप से महंगा साबित हो रहा है क्योंकि उनके उत्पाद जल्दी खराब होने वाले और समय-संवेदनशील होते हैं। पश्चिमी बाजारों में त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ, निर्यातकों को डिलीवरी की समय-सीमा पूरी करने की चिंता सता रही है। बढ़े हुए शिपिंग रेट और देरी का यह संयोजन लाभ मार्जिन (Profit Margins) को कम करने की धमकी दे रहा है। यदि माल समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचता है, तो कंपनियों को खराब होने या बाजार के अवसर चूकने के कारण राजस्व का नुकसान हो सकता है।

निर्यात पर असर

हालांकि भारत के मर्चेंडाइज निर्यात (Merchandise Exports) जुलाई 2026 में 19.5% की वृद्धि के साथ लचीलापन दिखाया था, लेकिन लॉजिस्टिक्स की बाधाएं एक बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। शिपिंग उद्योग 'ब्लैंक सेलिंग्स' (Blank Sailings) से भी निपट रहा है, जहां जहाज निर्धारित स्टॉप को छोड़ देते हैं, जिससे कार्गो स्पेस की उपलब्धता और कम हो जाती है। ये समस्याएं किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं; विभिन्न उद्योगों के निर्यातक भी विश्वसनीय शिपिंग क्षमता खोजने में इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

आगे क्या?

APEDA के साथ बैठक का नतीजा महत्वपूर्ण होगा। उद्योग का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इन अतिरिक्त खर्चों को अवशोषित करने में मदद करने के लिए कोई सब्सिडी, लॉजिस्टिकल सहायता, या नीतिगत समायोजन प्रदान करती है या नहीं। फिलहाल, इस क्षेत्र के लिए मुख्य निगरानी यह है कि शिपिंग रूट स्थिर होते हैं या आने वाले व्यस्त त्योहारी सीजन के दौरान शिपिंग लागत इसी ऊंचे स्तर पर बनी रहती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.