साल 2026 के पहले आठ महीनों में भारत का डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक **0.18%** गिरकर **110.53 मिलियन** पर आ गया है। DGCA के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मांग में कमी और SpiceJet जैसी कंपनियों में भारी फ्लाइट कैंसिलेशन के चलते पूरा एविएशन सेक्टर दबाव में दिख रहा है।
एविएशन सेक्टर इस समय डिमांड में सुस्ती और ऑपरेशनल अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में कुल घरेलू पैसेंजर वॉल्यूम 110.53 मिलियन रहा, जो 2025 की समान अवधि के 110.73 मिलियन से कम है। सिर्फ अगस्त 2026 में ही पैसेंजर ट्रैफिक में 6.34% की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार की सुस्त रफ्तार को बयां करती है।
लोड फैक्टर और गिरती दक्षता
एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी सीधे उनके 'लोड फैक्टर' (कितनी सीटें भरी हैं) से जुड़ी होती है। अगस्त 2026 में ज्यादातर कंपनियों का लोड फैक्टर नीचे आया है। Akasa Air का लोड फैक्टर 87.6% रहा, लेकिन यह जुलाई के 94.9% के मुकाबले काफी कम है। वहीं, SpiceJet का लोड फैक्टर 79.9% और IndiGo का 79.2% दर्ज किया गया। कम लोड फैक्टर का मतलब है कि एयरलाइंस को विमान भरने में संघर्ष करना पड़ रहा है, जो उनके मार्जिन पर सीधा असर डाल सकता है।
SpiceJet के सामने बड़ी चुनौती
रेगुलेटरी रडार पर SpiceJet फिलहाल सबसे आगे है। अगस्त में कंपनी की फ्लाइट कैंसिलेशन दर 20.92% रही, जबकि IndiGo की यह दर महज 0.33% और Akasa Air की 0.07% थी। कुल कैंसिलेशन में से आधे से ज्यादा की वजह 'तकनीकी खराबी' (Technical Malfunctions) रही। ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते एयरलाइंस को मरम्मत और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है, जो आने वाले समय में मुनाफे को प्रभावित करेगा।
देरी का सिलसिला और निवेशकों के लिए संकेत
फ्लाइट की पंक्चुअलिटी (समय पर उड़ान) भी गंभीर मुद्दा बनी हुई है। अगस्त में लगभग 1.39% उड़ानें दो घंटे से अधिक देरी से चलीं। SpiceJet की स्थिति चिंताजनक है, जहाँ 48.05% उड़ानें समय पर नहीं पहुँच सकीं। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि एयरलाइंस अपनी फ्लीट मेंटेनेंस और शेड्यूलिंग के बीच संतुलन कैसे बैठाती हैं।
