डिमांड और सप्लाई का बिगड़ा खेल
अप्रैल में डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक 1.408 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 1.6% कम है। एयरलाइंस ने अपनी क्षमता में 0.6% की कटौती की है, लेकिन मांग में आई गिरावट सप्लाई एडजस्टमेंट से ज़्यादा रही। इस वजह से पैसेंजर लोड फैक्टर (PLF) में मामूली गिरावट आई और यह 85.9% पर आ गया। एयरलाइंस के लिए यह एक चिंताजनक स्थिति है क्योंकि वे बढ़ती लागत के बीच टिकट की कीमतें उतनी नहीं बढ़ा पा रही हैं, जितनी कि ज़रूरी है। ग्राहकों की जेब पर बढ़े खर्चों का असर साफ दिख रहा है।
डॉलर और कच्चे तेल का डबल अटैक
डोमेस्टिक एयर ट्रैफिक के आंकड़ों से परे, सेक्टर की कमजोरी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के संगम में छिपी है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत में पिछले साल के मुकाबले करीब 25% की वृद्धि हुई है, जो सीधे तौर पर एयरलाइंस के मुनाफे को खा रही है। इसके अलावा, मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) जैसे खर्चों और एयरक्राफ्ट लीजिंग का एक बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी में होता है। ऐसे में, रुपये की अस्थिरता से एयरलाइंस पर और भी ज़्यादा दबाव बनता है। यह एक ऐसी साइकिल बना रहा है जहाँ एयरलाइंस को फिक्स्ड कॉस्ट्स को कवर करने के लिए महंगे टिकट बेचने पड़ते हैं, जो बदले में ट्रैफिक ग्रोथ को ही कम कर देता है।
विश्लेषकों की चिंताएं बढ़ीं
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा सेक्टर के लिए नेगेटिव आउटलुक जारी करना सिर्फ वॉल्यूम में आई कमी के बारे में नहीं है, बल्कि यह बैलेंस शीट की मजबूती में आई कमी को भी दर्शाता है। पिछले कुछ सालों के मुकाबले, जब पैंडेमिक के बाद डिमांड में तेज़ी देखी गई थी, इस बार ऐसी कोई बड़ी डिमांड बफर नहीं है। InterGlobe Aviation जैसी बड़ी कंपनियों के लिए ऑपरेटिंग लीवरेज का हाई डिग्री एक बड़ा रिस्क है। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं या डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होता है, तो सेक्टर लिक्विडिटी क्रंच का सामना कर सकता है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया के संवेदनशील इलाकों से उड़ानें जोखिम को और बढ़ाती हैं, जिस पर एयरलाइंस का कोई नियंत्रण नहीं है।
आगे का रास्ता
FY2027 के बाकी बचे महीनों में, एयरलाइंस के सामने फ्लीट विस्तार और कर्ज कम करने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। एनालिस्ट्स का मानना है कि आने वाला समय कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन और नेटवर्क रीस्ट्रक्चरिंग पर केंद्रित रहेगा। पिछली बार की डबल-डिजिट ग्रोथ के मुकाबले डोमेस्टिक ग्रोथ काफी धीमी रहने की उम्मीद है। ऐसे में, एयरलाइंस को अब ग्रोथ से ज़्यादा वर्किंग कैपिटल को बनाए रखने और ऑपरेटिंग मार्जिन को स्थिर करने पर ध्यान देना होगा।
