घाटे में कमी की राह:
ICRA के मुताबिक, एविएशन सेक्टर का नेट लॉस 2026-27 में घटकर ₹110-120 अरब रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 (FY26) में यह ₹170-180 अरब के करीब था। यह बड़ी गिरावट घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में 6-8% की बढ़ोतरी और लगभग 175-179 मिलियन यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद पर टिकी है। FY26 में कई ऑपरेशनल दिक्कतें, जैसे फ्लाइट कैंसिलेशन और पैसेंजर रिफंड, देखी गई थीं, जिनसे उबरने के बाद यह सुधार अपेक्षित है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 2024-25 (FY25) में यह लॉस करीब ₹55 अरब ही था, जो सेक्टर की परफॉरमेंस में भारी उतार-चढ़ाव को दिखाता है। ICRA ने आउटलुक को 'स्टेबल' बनाए रखा है, लेकिन यह सुधार मजबूत विस्तार के बजाय पिछली सामान्य स्थिति में वापसी ज्यादा है।
मंडराते बड़े खतरे:
सेक्टर के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। FY26 के लिए इंटरेस्ट कवर (Interest Cover) घटकर 0.7-0.9 गुना रह जाने का अनुमान है, जो FY25 के 1.8 गुना से काफी कम है। हालांकि FY27 में इसके सुधरकर 1.3-1.5 गुना होने की उम्मीद है, लेकिन यह अभी भी बहुत ज्यादा नहीं है।
- महंगे ऑपरेशन्स: दुनिया भर में एयरक्राफ्ट डिलीवरी में देरी और सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण एयरलाइन्स को पुराने, कम फ्यूल एफिशिएंट एयरक्राफ्ट को इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस कारण मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है।
- डॉलर पर निर्भरता: एयरक्राफ्ट लीज, फ्यूल और मेंटेनेंस जैसे खर्च डॉलर में होते हैं। 3.2% रुपये की कमजोरी (FY26 के पहले 9 महीनों में) ने इन खर्चों को और बढ़ा दिया है।
- ईंधन की कीमतें: एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें 11 महीने में 4% गिरी हैं, लेकिन ये अभी भी कोविड-पूर्व स्तर से ज्यादा हैं। फ्यूल लागत एयरलाइन के ऑपरेटिंग खर्च का 30-40% तक हो सकती है।
- बढ़ता कर्ज: CRISIL रेटिंग्स के अनुसार, मार्च 2026 तक इंडस्ट्री का नेट डेट (लीज लायबिलिटी सहित) 10% बढ़कर ₹1.1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। नेट डेट-टू-ऑपरेटिंग प्रॉफिट रेशियो 5-5.5 गुना हो सकता है। IndiGo जैसी बड़ी कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 2021-22 में 33.04% तक पहुंच गया था।
- ऐतिहासिक नुकसान: सेक्टर ने FY2022 और FY2023 में भी भारी नुकसान उठाया है, जो इसकी साइक्लिकल (cyclical) नेचर को दर्शाता है।
भविष्य की राह:
इन सब खतरों के बावजूद, भारत में हवाई यात्रा की मांग मजबूत बनी हुई है। इकोनॉमिक ग्रोथ और बढ़ता मिडिल क्लास इस मांग को बढ़ा रहा है। सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर पहलें भी लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल को सपोर्ट करती हैं। ICRA का स्टेबल आउटलुक इसी उम्मीद पर टिका है कि डोमेस्टिक ट्रैफिक बढ़ता रहेगा और ऑपरेटिंग माहौल सुधरेगा। पर, सेक्टर को लागत प्रबंधन, विशेष रूप से फ्यूल और करेंसी के जोखिम को कम करने, फ्लीट को मॉडर्न बनाने और कर्ज घटाने पर ध्यान देना होगा, ताकि आने वाले सालों में इसकी वित्तीय सेहत बनी रहे।