आउटलुक 'Negative' की ओर
ICRA ने भारत के एविएशन सेक्टर के आउटलुक को 'Stable' से बदलकर 'Negative' कर दिया है। यह बदलाव सेक्टर की वित्तीय सेहत पर बढ़ते दबाव का संकेत देता है, जो एयरलाइंस के लिए आने वाले समय को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
भू-राजनीतिक और आर्थिक दबावों का संगम
इस बड़ी गिरावट की कई वजहें हैं। वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते फरवरी 2026 के आखिर से फ्लाइट्स के रूट लंबे हो गए हैं, जिससे उड़ानों का समय बढ़ गया है। इसके अलावा, भारतीय रुपये का कमजोर होना और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्चों को कई गुना बढ़ा रही हैं। ICRA का मानना है कि इन दिक्कतों का असर एयरलाइंस के प्रॉफिट पर पड़ेगा।
मुनाफे और मांग पर असर
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY2026) के लिए पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ अब सिर्फ 0-3% रहने का अनुमान है, जो काफी कम है। वहीं, भारतीय एयरलाइंस के लिए इंटरनेशनल ट्रैफिक 7-9% बढ़ सकता है। FY2027 के लिए भी अनुमान कम रखे गए हैं, जो आने वाले समय में सेक्टर के लिए मुश्किलों का लंबा दौर बता रहे हैं।
लागत के बीच एयरफेयर कैप्स हटे
एक और बड़ी चुनौती यह है कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिसंबर 2025 में एयरफेयर कैप्स (किराए की सीमा) हटा दिए हैं। ऐसे में, बढ़ती लागतों के बीच टिकट की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जो पैसेंजर ग्रोथ को और धीमा कर सकती है। सेक्टर अब FY2026 में ₹170 अरब से ₹180 अरब का नेट लॉस झेलने की उम्मीद कर रहा है, और FY2027 के अनुमान भी घटा दिए गए हैं।
फ्यूल की कीमतें और रुपया बन रहे सिरदर्द
ईंधन एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च है, जो कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 30-40% होता है। इसके अलावा, कुल खर्चों का 35-50% डॉलर में होता है, जिससे गिरते रुपये का सीधा असर एयरलाइंस पर पड़ता है। 1 मार्च 2026 तक, ATF की कीमतें पिछली रिपोर्टिंग अवधि की तुलना में 5.7% बढ़ चुकी हैं। वहीं, हालिया संघर्षों से पहले $72 प्रति बैरल पर चल रहा ब्रेंट क्रूड ऑयल अब $105 प्रति बैरल के पार जा चुका है।
एयरक्राफ्ट ग्राउंडिंग से क्षमता सीमित
सप्लाई चेन की दिक्कतें और इंजन मेंटेनेंस की समस्याओं के चलते कई एयरक्राफ्ट फिलहाल ग्राउंडेड (सेवा से बाहर) हैं। अनुमान है कि कुल बेड़े का लगभग 13-15% यानी करीब 117 प्लेन अभी इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। इससे एयरलाइंस की क्षमता सीमित हो गई है और जो प्लेन चल रहे हैं, उन पर लागत का बोझ बढ़ गया है।
वित्तीय सेहत लगातार गिर रही
यात्रियों की मजबूत मांग के बावजूद (फरवरी 2026 में लोड फैक्टर 93% के करीब था), एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति बिगड़ रही है। ICRA का अनुमान है कि FY2025 में 1.8 गुना रहा इंटरेस्ट कवरेज रेशियो FY2026 में घटकर 0.7-0.9 गुना रह जाएगा। सेक्टर में कोई भी हल्की रिकवरी भू-राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगी, जो फिलहाल इस सेक्टर के कमजोर आउटलुक को और पुख्ता करती है।