एविएशन सेक्टर पर मंदी का साया, कंपनियां मुश्किल में
भारतीय एविएशन सेक्टर (Indian Aviation Sector) के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। यात्री ट्रैफिक ग्रोथ घटकर 2% पर आ गई है, जो पिछले कई सालों में सबसे कम है। यह गिरावट डोमेस्टिक रूट पर सिर्फ 1% और इंटरनेशनल रूट पर 3% रही। इसकी तुलना में FY25 में डोमेस्टिक ग्रोथ 8% और इंटरनेशनल 14% थी।
क्यों गिरी ग्रोथ की रफ्तार?
इस धीमी रफ्तार के पीछे कई वजहें हैं। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions), एयर इंडिया (Air India) के एक प्लेन का एक्सीडेंट जिसके कारण कुछ फ्लाइट्स को ग्राउंड करना पड़ा, और इंडिगो (IndiGo) के ऑपरेशनल डिस्टर्बेंस ने इस सेक्टर को प्रभावित किया है। इन सब का सीधा असर एयरलाइंस की कमाई पर पड़ रहा है।
एयरलाइंस की जेब पर भारी मार
यात्रियों की घटती संख्या और बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट (operational costs) की वजह से एयरलाइंस की माली हालत बिगड़ गई है। अनुमान है कि FY26 में यह सेक्टर ₹17,000 से ₹18,000 करोड़ का नेट लॉस (net loss) दर्ज कर सकता है। यह FY25 के ₹5,500 करोड़ के घाटे से कहीं ज्यादा है। इस भारी घाटे का मुख्य कारण भू-राजनीतिक मुद्दे, रुपए का गिरना (currency depreciation) और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की आसमान छूती कीमतें हैं। ATF लागत कुल खर्च का 30-40% है, जो रुपए के कमजोर होने से और बढ़ जाती है क्योंकि प्लेन लीज और मेंटेनेंस जैसे खर्चे डॉलर में होते हैं।
इंडिगो और एयर इंडिया की भी बिगड़ी हालत
इंडिगो (IndiGo) जैसी बड़ी कंपनी का भी हाल बुरा है। Q3 FY26 में रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, उसका नेट प्रॉफिट 78% घटकर सिर्फ ₹549 करोड़ रह गया। वहीं, एयर इंडिया (Air India) का घाटा FY26 में दोगुना होकर ₹20,000 करोड़ से ऊपर पहुंचने की आशंका है। सेक्टर की फाइनेंशियल हेल्थ की बात करें तो इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (interest coverage ratio) FY25 के 1.8 गुना से घटकर FY26 में 0.7 से 0.9 गुना रहने का अनुमान है, जो बढ़ती वित्तीय परेशानी को दिखाता है। SpiceJet भी ऑपरेशनल दिक्कतों और घटती मार्केट शेयर से जूझ रही है।
FY27 में रिकवरी की उम्मीद, पर चुनौतियां बरकरार
सेक्टर की रिकवरी FY27 में मिडिल ईस्ट के तनाव कम होने और फ्यूल प्राइस स्थिर होने पर निर्भर करेगी। डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक 6-8% तक बढ़ सकता है, और नेट लॉस घटकर ₹11,000-₹12,000 करोड़ रह सकता है। हालांकि, हाई फ्यूल कॉस्ट और करेंसी वोलेटिलिटी जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। इन मुश्किलों को देखते हुए सरकार भी एयरलाइंस को राहत देने पर विचार कर रही है, जो सेक्टर की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।
