Jet Fuel Hike पर Airlines का बड़ा दांव! तेल कंपनियों से की ये खास अपील

TRANSPORTATION
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AuthorNeha Patil|Published at:
Jet Fuel Hike पर Airlines का बड़ा दांव! तेल कंपनियों से की ये खास अपील
Overview

भारत की प्रमुख एयरलाइंस कंपनियों ने सरकारी तेल कंपनियों से Jet Fuel (ATF) की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी को टालने का अनुरोध किया है। एयर इंडिया (Air India) और इंडिगो (IndiGo) जैसी बड़ी एयरलाइंस, बढ़ते खर्च और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से हो रहे नुकसान का हवाला देते हुए राहत की मांग कर रही हैं। इस मामले में सरकारी तेल मंत्रालय के भी शामिल होने की खबर है, और **1 जून** से पहले कोई बड़ा फैसला आ सकता है, जो पहले भी ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ऐसे हस्तक्षेपों को दर्शाता है।

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यह गुहार ऐसे समय में आई है जब एयरलाइंस भारी वित्तीय दबाव झेल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, देश की सरकारी रिफाइनरियां, जिनमें इंडियन ऑयल (Indian Oil), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (Hindustan Petroleum) और भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) शामिल हैं, घरेलू उड़ानों के लिए Jet Fuel लगभग ₹92,000 प्रति किलोलीटर के नुकसान पर बेच रही हैं। इन कंपनियों ने जून के लिए Jet Fuel की कीमतों में 25% तक की बढ़ोतरी करने पर विचार किया है। एयर इंडिया (Air India), इंडिगो (IndiGo) और स्पाइसजेट (SpiceJet) जैसी प्रमुख एयरलाइंस इस बढ़ोतरी को टालने के लिए पुरजोर लॉबिंग कर रही हैं।

सरकारी हस्तक्षेप का इतिहास

भारत का तेल मंत्रालय इन बातचीत में शामिल है, जो पिछले साल अप्रैल और मई में भी देखने को मिला था। मंत्रालय ने पहले Jet Fuel की कीमतों में 25% की बढ़ोतरी को सीमित किया था और मई में तेल कंपनियों से कीमतें स्थिर रखने को कहा था, जब कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ी थीं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारतीय एयरलाइन बाजार बढ़ती लागतों के प्रति कितना संवेदनशील है।

अंतरराष्ट्रीय बनाम घरेलू कीमतें

यह मूल्य वार्ता और संभावित सीमाएं केवल घरेलू उड़ानों के लिए Jet Fuel से संबंधित हैं। अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए Jet Fuel विनियमित नहीं है और इसमें कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जो अप्रैल में दोगुना से अधिक हो गया और मई तक $1,511.86 प्रति किलोलीटर तक पहुंच गया।

उद्योग पर व्यापक दबाव

Jet Fuel एयरलाइंस के लिए एक बड़ा खर्च है, जो कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट (operating costs) का लगभग 40% होता है। उद्योग ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन की कीमतें नियंत्रित नहीं की गईं तो उड़ानों को निलंबित करना पड़ सकता है। एयरलाइंस कमजोर रुपये का भी सामना कर रही हैं, जिससे विमानों की लीजिंग (leasing) और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की सेवाओं के लिए भुगतान की लागत बढ़ जाती है। वे टैक्स कटौती या स्थगन (deferrals) की भी मांग कर रही हैं। टिकट की बढ़ती कीमतों के कारण मांग में नरमी भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.