DGCA की नाकामी या एयरलाइंस की लापरवाही? 377 प्लेन में बार-बार खराबी, एविएशन सेक्टर पर मंडराया खतरा

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AuthorNeha Patil|Published at:
DGCA की नाकामी या एयरलाइंस की लापरवाही? 377 प्लेन में बार-बार खराबी, एविएशन सेक्टर पर मंडराया खतरा
Overview

भारतीय एयरलाइंस के लिए चिंताजनक खबर आ रही है। पिछले करीब 14 महीनों में **377** से ज़्यादा एयरक्राफ्ट में बार-बार टेक्निकल खराबी पाई गई है, जिससे एविएशन सेक्टर में हड़कंप मचा है। IndiGo और Air India जैसी बड़ी एयरलाइंस इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं।

यह ख़ुलासा कि पिछले करीब 14 महीनों में 377 एयरक्राफ्ट में बार-बार खराबी सामने आई है, भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। खासकर तब, जब एविएशन रेगुलेटर Directorate General of Civil Aviation (DGCA) अपनी निगरानी (surveillance) बढ़ा रहा है, लेकिन वहीं दूसरी ओर DGCA खुद स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है।

रेगुलेटरी दबाव और फ्लीट की रिलायबिलिटी

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जनवरी से लेकर 3 फरवरी 2026 तक, 377 प्लेन में बार-बार टेक्निकल दिक्कतें दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज़्यादा 148 प्लेन IndiGo के थे, जिनका एनालिसिस किया गया था। इसके बाद Air India का नंबर आता है, जिसके 166 में से 137 प्लेन में खराबी पाई गई। Air India Express के 101 में से 54 प्लेन में भी ऐसी ही दिक्कतें दिखीं। SpiceJet के 43 में से 16 और Akasa Air के 32 में से 14 प्लेन भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

DGCA ने भी अपनी निगरानी काफी तेज कर दी है, जिसके तहत 3,890 से ज़्यादा इंस्पेक्शन और ऑडिट किए गए हैं। हालांकि, यह तेजी तब हो रही है जब DGCA के टेक्निकल विंग में स्टाफ की भारी कमी है। कुल 1,063 अप्रूव्ड टेक्निकल पोस्ट्स में से लगभग आधे खाली पड़े हैं। ऐसे में, यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या DGCA के पास इन बढ़ती दिक्कतों को गहराई से जांचने और तुरंत समाधान निकालने की क्षमता है।

एयरलाइंस पर बढ़ता फाइनेंशियल बोझ

प्लेन में बार-बार आने वाली ये खराबी एयरलाइंस के लिए बड़ा फाइनेंशियल बोझ बन रही है। मेंटेनेंस की वजह से प्लेन को ग्राउंड करना (Aircraft On Ground - AOG) या फ्लाइट्स का डिले होना, एयरलाइंस को हर घंटे $10,000 से $150,000 तक का नुकसान पहुंचा सकता है। ग्लोबल लेवल पर, ऐसी रुकावटों से हर साल करीब $60 अरब का रेवेन्यू लॉस होता है।

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo, जिसने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹7,587.5 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स दर्ज किया, उस पर सबसे ज़्यादा ₹67,088.4 करोड़ का कर्ज है। साथ ही, यह कंपनी कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की जांच का भी सामना कर रही है। वहीं, Air India ने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹3,976 करोड़ का स्टैंडअलोन लॉस रिपोर्ट किया है, भले ही ऑपरेशनल प्रॉफिट में आई हो। 3 फरवरी 2026 को Air India के एक Boeing 787 Dreamliner में फ्यूल कंट्रोल स्विच की दिक्कत के चलते उसे ग्राउंड करना पड़ा, जो कि एयरलाइन के लिए एक और चिंता का विषय है।

SpiceJet जैसी फाइनेंसियली कमजोर एयरलाइन, जिसने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹58.1 करोड़ का लॉस दिखाया है, उसके लिए मेंटेनेंस इश्यूज या खराब पब्लिक इमेज से होने वाले किसी भी ऑपरेशनल डिस्टर्बेंस उसके नाजुक फाइनेंशियल पोजीशन को और बिगाड़ सकती है। Akasa Air ने भी फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹1,983.4 करोड़ का बड़ा लॉस दर्ज किया है, हालांकि रेवेन्यू में बढ़ोतरी देखी गई है।

मार्केट और सेक्टर का मौजूदा हालात

प्लेन की रिलायबिलिटी से जुड़ी ये लगातार दिक्कतें और रेगुलेटर की क्षमता पर उठते सवाल, एविएशन सेक्टर में निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, 2023 में DGCA की अपनी रिपोर्ट के अनुसार भारत का एविएशन सेफ्टी रिकॉर्ड सुधरा है, लेकिन बार-बार होने वाली ये खराबी ऑपरेशनल लेवल पर बनी हुई चुनौतियों को दिखाती हैं। फिनेंशियल परफॉरमेंस में भी बड़ा अंतर है: IndiGo, जिसका P/E रेश्यो लगभग 28.3x है, जबरदस्त प्रॉफिट और मार्केट शेयर के साथ काम कर रही है। इसके विपरीत, SpiceJet का नेगेटिव P/E रेश्यो लगातार हो रहे फाइनेंशियल नुकसान की ओर इशारा करता है।

यह स्थिति सेक्टर में एक बड़ा बंटवारा दिखाती है, जहाँ मार्केट लीडर्स अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, वहीं कुछ कंपनियां बढ़ती रेगुलेटरी जांच और मेंटेनेंस की जटिलताओं के बीच अपनी ऑपरेशनल और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

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