एविएशन सेक्टर पर लागत का भारी दबाव
भारतीय एविएशन सेक्टर (Indian Aviation Sector) इन दिनों भारी लागत के दबाव से जूझ रहा है। दुनिया भर में बढ़ती तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) ने एयरलाइंस की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसी बीच, Indian Airlines ने सरकार से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में बड़े सुधारों की मांग फिर से तेज कर दी है, खासकर एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल को लेकर।
जेट फ्यूल टैक्स का पेंच
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ATF, जो एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 35-40% तक होता है, वह अभी GST सिस्टम के बाहर है। इस पर लगने वाले सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (लगभग 11%) और स्टेट वैट (VAT) (जो 1% से लेकर 29% तक है) पर एयरलाइंस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम नहीं कर पातीं। इससे 'टैक्स पर टैक्स' (tax on tax) वाली स्थिति बनती है और लाखों करोड़ों रुपये के टैक्स क्रेडिट अटक जाते हैं, जिससे एयरलाइंस का कैश फ्लो (cash flow) बुरी तरह प्रभावित होता है।
इकोनॉमी क्लास टिकटों पर भी बदलाव की मांग
इसके अलावा, एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास (economy class) की टिकटों पर लगने वाले GST को लेकर भी एक प्रस्ताव दिया है। फिलहाल इस पर 5% GST लगता है, जिसमें पूरा ITC नहीं मिलता। एयरलाइंस चाहती हैं कि इसे बढ़ाकर 18% कर दिया जाए। इससे उन्हें मौजूदा टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा और कैश फ्लो सुधरेगा। प्रीमियम केबिन (premium cabins) पर पहले से ही 18% GST लगता है, जहाँ ITC उपलब्ध है।
RCM पर भी मांगी राहत
साथ ही, एयरलाइंस मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सर्विसेज और बुकिंग सॉफ्टवेयर जैसी चीजों पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के तहत लगने वाले GST पर भी राहत चाहती हैं। वे चाहती हैं कि इन पर ITC का इस्तेमाल हो सके, बजाय इसके कि उन्हें तुरंत नकदी देनी पड़े।
राज्यों की राजस्व की चिंता बनी रोड़ा
हालांकि, ATF को GST के दायरे में लाने में सबसे बड़ा रोड़ा राज्यों की ओर से आ रहा है। ATF पर लगने वाला VAT राज्यों के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। अलग-अलग राज्यों में VAT की दरें 1% से लेकर 29% तक हैं। अगर ATF को GST में लाया जाता है, तो राज्यों को इस महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत से हाथ धोना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र जैसे राज्य, जहां VAT 18% है, अगर इसे घटाकर 1% कर दें तो राज्य को सालाना ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है।
बढ़ती ग्लोबल तेल कीमतों का असर
फिलहाल, कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में भारी उछाल (Brent crude $125 प्रति बैरल के पार) के चलते जेट फ्यूल की लागत और भी बढ़ गई है। अब ATF एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च का 55-60% तक पहुँच गया है, जो पहले 30-40% होता था। यह भारतीय एयरलाइंस को वैश्विक स्तर पर कम प्रतिस्पर्धी (less competitive) बना रहा है। कमजोर रुपया (weaker rupee) भी लीज और मेंटेनेंस जैसी डॉलर-आधारित लागतों को बढ़ा रहा है।
पिछला प्रयास असफल,outlook 'Negative'
यह पहली बार नहीं है जब ATF को GST के तहत लाने की बात हो रही है। पहले भी इस पर चर्चा हुई है, लेकिन राज्यों के राजस्व की चिंताओं के कारण कोई सहमति नहीं बन पाई। रेटिंग एजेंसी ICRA ने भी इन दबावों के चलते भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए अपना आउटलुक 'Negative' कर दिया है और FY2026 के लिए बड़े घाटे का अनुमान लगाया है।
GST काउंसिल की बैठक पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें GST काउंसिल की अगली बैठक पर टिकी हैं। यह बैठक एविएशन इंडस्ट्री की इन मांगों को पूरा करने में अहम साबित हो सकती है। हालांकि, राज्यों की आपसी सहमति और उनके वित्तीय हितों के बीच तालमेल बिठाना ही ATF को GST के दायरे में लाने की राह आसान करेगा।
