Aviation Sector: घाटे के बीच एयरलाइंस का बड़ा दांव, भारत में बनाएंगी MRO हब्स

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Aviation Sector: घाटे के बीच एयरलाइंस का बड़ा दांव, भारत में बनाएंगी MRO हब्स

भारतीय एयरलाइंस अब अपने बेड़े को संभालने के लिए विदेशी केंद्रों पर निर्भरता कम कर रही हैं। एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर ने देश के भीतर ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधाएं तैयार करने की योजना बनाई है, हालांकि FY2027 में पूरे सेक्टर के लिए **₹38,000 करोड़** के भारी नुकसान का अनुमान है।

घरेलू विस्तार की तैयारी

आने वाले वर्षों में भारतीय एयरलाइंस का फ्लीट साइज 800 विमानों से बढ़कर 2,250 विमानों तक पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ती संख्या को देखते हुए Air India, IndiGo और Akasa Air ने अपनी मेंटेनेंस रणनीति को पूरी तरह से घरेलू स्तर पर लाने का फैसला किया है। वर्तमान में, विदेशी केंद्रों पर निर्भरता के कारण जियो-पॉलिटिकल तनाव या सप्लाई चेन में देरी से एयरलाइंस को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

प्रमुख प्रोजेक्ट्स और डेडलाइन्स

  • Air India: बेंगलुरु में 2027 के अंत तक एक डेडिकेटेड MRO फैसिलिटी शुरू करने की तैयारी है, जो इसके 540 नए विमानों को सर्विस देगी।
  • Akasa Air: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 2028 तक अपनी सुविधा लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • मार्केट पोटेंशियल: जानकारों का मानना है कि भारतीय MRO मार्केट 2035 तक बढ़कर USD 9.5 बिलियन के स्तर पर पहुंच सकता है।

वित्तीय जोखिम और चिंताएं

अच्छी योजनाओं के बावजूद सेक्टर के सामने चुनौती कम नहीं है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने FY2027 के लिए एविएशन सेक्टर का आउटलुक 'नेगेटिव' रखा है। ईंधन (ATF) की ऊंची कीमतें और रुपये की कमजोरी ने एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च को बढ़ा दिया है, जिससे कुल नुकसान ₹36,000 करोड़ से ₹38,000 करोड़ तक रहने की आशंका है।

निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां इतने बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर और बढ़ते कर्ज के बीच अपना कैश फ्लो कैसे मैनेज करती हैं। सफलता पूरी तरह से उनकी एग्जीक्यूशन क्षमता और GMR Aero Technic या Airworks जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ सहयोग पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.