जिओ-पॉलिटिकल टेंशन का सीधा असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) ने भारतीय एयरलाइन्स की कमर तोड़ दी है। इराक, ईरान और कई खाड़ी देशों के एयरस्पेस बंद होने के कारण, एयरलाइन्स को अपनी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के रूट बदलने पड़ रहे हैं। इससे न केवल उड़ानों का समय बढ़ रहा है, बल्कि फ्यूल की खपत (Fuel Burn) भी काफी ज्यादा हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन बंद एयरस्पेस से बचकर निकलने में प्रति फ्लाइट आवर $6,000 तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
फ्यूल और ऑपरेटिंग कॉस्ट में भारी उछाल
एयरलाइन्स के कुल खर्च का 30% से 40% हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर जाता है। रूट बदलने से फ्यूल की खपत बढ़ने का सीधा मतलब है ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस (Operating Expenses) में जबरदस्त बढ़ोतरी। मौजूदा संकट ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को $82 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है, जिससे ATF की कीमतें भी ₹1 लाख प्रति किलोलीटर के करीब बनी हुई हैं।
इस बढ़ती लागत का असर सीधे शेयर बाजार पर दिख रहा है। 2 मार्च 2026 को इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के शेयर 7.5% तक गिरकर ₹4,460.90 पर आ गए थे, वहीं स्पाइसजेट (SpiceJet) के शेयरों में भी 7% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। यह बाजार की घबराहट को दर्शाता है कि एयरलाइन्स के मार्जिन (Margin) पर दबाव बढ़ेगा।
ब्रोकरेज की चिंता और रुपी का इम्पेक्ट
विश्लेषकों की मानें तो, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) में $5 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से IndiGo की अर्निंग्स पर शेयर (EPS) में करीब 13% की कमी आ सकती है। इसके अलावा, भारतीय रुपये (Indian Rupee) में आई कमजोरी भी एयरलाइन्स के लिए एक बड़ा झटका है। रुपये में 1% की डेप्रिसिएशन (Depreciation) से प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पर 5% से 6% का नकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि लीज रेंटल और मेंटेनेंस जैसे खर्चे डॉलर में होते हैं।
ऐतिहासिक रूप से भी, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर एयरलाइन्स के शेयरों पर देखा गया है। मई 2025 में पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने पर भी IndiGo और SpiceJet के शेयरों में बड़ी गिरावट आई थी।
DGCA की चेतावनी और फ्लाइट कैंसलेशन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने वेस्ट एशिया के 11 फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन्स (FIRs) के लिए हाई-रिस्क एयरस्पेस अलर्ट जारी किया है। एयरलाइन्स को इन जोन से बचने के निर्देश दिए गए हैं, जब तक कि पूरी तरह से रिस्क असेसमेंट न हो जाए। इसके चलते 1 मार्च 2026 को ही 350 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं।
आगे क्या?
ऑपरेशनल कॉस्ट में लगातार बढ़ोत्तरी और फ्यूल की अस्थिर कीमतों के कारण, एयरलाइन्स को यात्रियों से ज्यादा किराया वसूलने पर मजबूर होना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर जिओ-पॉलिटिकल स्थिति और बिगड़ती है, तो एयरफेयर्स (Airfares) में 10% से 15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) भी फ्यूल स्टॉक पर पैनी नजर रखे हुए है, ताकि सप्लाई चेन में कोई बड़ी बाधा न आए। कुल मिलाकर, भारतीय एविएशन सेक्टर का भविष्य सीधे तौर पर ग्लोबल एनर्जी मार्केट की स्थिरता और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने पर निर्भर करेगा।
