भारतीय घरेलू एयरलाइनों ने मई में **1.53 करोड़** यात्रियों को सफर कराया, जो पिछले साल इसी अवधि की तुलना में **9.49%** ज्यादा है। IndiGo अपनी **64.9%** मार्केट शेयर के साथ टॉप पर बनी हुई है, वहीं Air India Group अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।
घरेलू हवाई सफर में आई रफ्तार
भारत में घरेलू हवाई यात्रा (Domestic Air Travel) ने मई में अच्छी रफ्तार पकड़ी है। इस महीने एयरलाइनों ने कुल 1.53 करोड़ यात्रियों को सफर कराया। यह आंकड़ा पिछले साल मई की तुलना में 9.49% की बढ़ोतरी दिखाता है। अप्रैल में 1.38 करोड़ यात्रियों की संख्या दर्ज की गई थी, जिससे मांग में लगातार रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं।
मार्केट शेयर और परफॉर्मेंस
IndiGo अभी भी 64.9% मार्केट शेयर के साथ सबसे बड़ी एयरलाइन बनी हुई है। हालांकि, Air India Group ने अपनी जगह मजबूत करते हुए 25.6% शेयर हासिल कर लिया है। छोटी एयरलाइनों में Akasa Air का शेयर 5.8% और SpiceJet का शेयर 2.5% रहा।
the-time performance (OTP) यानी समय पर उड़ानों की परफॉर्मेंस भी निवेशकों के लिए अहम है। मई में IndiGo ने 82.8% OTP दर्ज किया, Akasa Air 78.3% और Air India Group 74.5% के साथ पीछे रहा। SpiceJet की OTP सिर्फ 26.5% रही, जो चिंता का विषय है।
देरी का एयरलाइनों की कमाई पर असर
यात्रियों की बढ़ती संख्या अच्छी खबर है, लेकिन उड़ानों में देरी और कैंसलेशन (Flight Cancellations) एयरलाइनों के लिए वित्तीय बोझ बने हुए हैं। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के आंकड़ों के मुताबिक, मई में 0.55% उड़ानें रद्द हुईं, जिससे 63,000 से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए। एयरलाइनों को इसके लिए करीब ₹70.32 लाख का मुआवजा देना पड़ा।
इसके अलावा, उड़ानों में देरी के कारण 1.77 लाख से ज्यादा यात्री परेशान हुए, जिस पर एयरलाइनों को लगभग ₹4.24 करोड़ खर्च करने पड़े। वहीं, 98.60 लाख रुपये का भुगतान उन यात्रियों को हुआ जिन्हें बोर्डिंग से मना कर दिया गया था। ये खर्चे एयरलाइनों के लिए लगातार बने हुए हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या बढ़ती यात्री संख्या इन खर्चों को पूरा करने में सक्षम है।
भविष्य में, एयरलाइनों को पैसेंजर लोड फैक्टर और किराये को बनाए रखते हुए ईंधन और ऑपरेशनल खर्चों का प्रबंधन करना होगा। साथ ही, Air India Group की विस्तार योजनाएं आने वाले समय में मार्केट में क्या बदलाव लाती हैं, यह देखना भी अहम होगा।
